आपदा की तैयारी की बात होते ही ज़्यादातर सूचियाँ पानी, टॉर्च और बिस्किट पर रुक जाती हैं। लेकिन बाढ़, चक्रवात या भूकंप के बाद जो लोग सबसे पहले और सबसे गंभीर मुश्किल में पड़ते हैं, वे भूखे-प्यासे लोग नहीं होते — वे वे लोग होते हैं जिनकी रोज़ की दवा बीच में छूट जाती है।
भारत में यह कोई छोटा समूह नहीं है। हर मोहल्ले में डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, थायरॉइड, मिर्गी, दमा या टीबी की दवा रोज़ लेने वाले लोग हैं। इनमें से कई दवाएँ ऐसी हैं जिन्हें दो-तीन दिन छोड़ देना सिर्फ़ “असुविधा” नहीं होता।
यह लेख इसी अनदेखी कड़ी पर है — आपदा से पहले दवाओं का बैकअप कैसे बनाएँ, इंसुलिन जैसी ठंडक माँगने वाली दवा को बिजली कटौती में कैसे संभालें, और घर के अलग-अलग सदस्यों के लिए क्या-क्या अलग तैयार करना पड़ता है।
स्पष्ट कर दें: यहाँ दी गई बातें सामान्य तैयारी की जानकारी हैं, किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं। दवा की मात्रा, भंडारण या बदलाव से जुड़ा हर निर्णय अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से पूछकर ही करें।
सबसे पहले टूटने वाली कड़ी: दवा, बिजली और सड़क
आपदा में दवा की आपूर्ति एक साथ कई जगह से टूटती है, और आमतौर पर इसी क्रम में:
- सड़क बंद — जलभराव या भूस्खलन से मेडिकल स्टोर तक पहुँचना मुश्किल हो जाता है।
- स्टोर बंद या स्टॉक ख़त्म — जो दुकानें खुली भी रहती हैं, उनका स्टॉक 24–48 घंटे में साफ़ हो जाता है, और सप्लाई ट्रक भी उन्हीं बंद सड़कों पर अटके होते हैं।
- बिजली गुल — फ़्रिज बंद, यानी इंसुलिन और कुछ अन्य दवाओं की ठंडक ख़तरे में।
- पर्चा गुम — घर में पानी भर जाने या जल्दी में निकलने पर पुराना पर्चा और दवा के डिब्बे पीछे छूट जाते हैं। नए डॉक्टर को यह बताना कि “कोई सफ़ेद गोली थी” किसी काम नहीं आता।
- राहत शिविर में भीड़ — मेडिकल कैंप लगते ज़रूर हैं, लेकिन वहाँ प्राथमिकता चोट और तेज़ बुखार को मिलती है; पुरानी बीमारी की नियमित दवा अक्सर कतार में पीछे रह जाती है।
अग्निशमन और बचाव सेवा में काम करते हुए मैंने बार-बार यही देखा कि निकासी के कुछ दिन बाद शिविरों में सबसे ज़्यादा तबीयत बिगड़ने के मामले चोट के नहीं होते थे। वे उन लोगों के होते थे जिनकी ब्लड प्रेशर या दिल की दवा तीन-चार दिन से छूटी हुई थी। घटना के दिन वे बिल्कुल ठीक दिखते थे — मुश्किल बाद में आई, और चुपचाप आई।
“7 + 7” नियम: कितनी दवा बैकअप में रखें
सबसे व्यावहारिक लक्ष्य यह है:
- 7 दिन की दवा गो-बैग में — जो घर छोड़ते समय आपके साथ निकल जाए।
- 7 दिन की दवा घर के स्टॉक में — जो घर में फँस जाने की स्थिति के लिए हो।
यानी कुल मिलाकर हमेशा लगभग दो हफ़्ते का अतिरिक्त बफ़र। यह बड़ा लक्ष्य लग सकता है, लेकिन इसे एक बार में नहीं बनाना होता।
बफ़र बनाने का व्यावहारिक तरीक़ा
दवा जमा करने का मतलब जमाख़ोरी नहीं है — इसका तरीक़ा है थोड़ा जल्दी भरवाना। अगर आपकी दवा 30 दिन में ख़त्म होती है, तो 30वें दिन के बजाय 25वें दिन नई पर्ची भरवा लें। हर महीने 5 दिन बचते हैं, और छह महीने में आपके पास लगभग एक महीने का बफ़र अपने आप बन जाता है — बिना किसी अतिरिक्त डॉक्टर विज़िट के।
अगली बार डॉक्टर से मिलते समय सीधे यह पूछ लेना सबसे अच्छा रहता है: “बाढ़ या आपात स्थिति के लिए मैं कुछ अतिरिक्त दवा घर में रख सकूँ, इसका क्या तरीक़ा है?” कई डॉक्टर इस स्थिति को समझते हैं और लंबी अवधि की पर्ची लिख देते हैं, ख़ासकर बाढ़-प्रवण इलाक़ों में।
घुमाकर इस्तेमाल करें (रोलिंग स्टॉक)
बैकअप दवा को अलग रखकर भूल जाना सबसे आम ग़लती है — दो साल बाद वह एक्सपायर मिलती है। इसके बजाय हमेशा पुरानी दवा पहले इस्तेमाल करें और नई पीछे रखें। हर महीने की एक तय तारीख़ — जैसे 1 तारीख़ — पर डिब्बा खोलकर एक्सपायरी देख लेना पर्याप्त है।
पूरी दवा-सूची एक काग़ज़ पर
यह पूरे लेख का सबसे सस्ता और सबसे उपयोगी क़दम है, और इसमें दस मिनट लगते हैं।
एक काग़ज़ पर हर सदस्य के लिए यह लिखें:
- नाम, उम्र, ब्लड ग्रुप
- बीमारी का नाम (जैसे टाइप-2 डायबिटीज़, हाइपरटेंशन)
- दवा का पूरा नाम, ताक़त (mg) और कब-कब लेनी है — सिर्फ़ ब्रांड नहीं, हो सके तो जेनेरिक नाम भी, क्योंकि दूसरी जगह वही ब्रांड न मिलने पर जेनेरिक नाम से विकल्प मिल जाता है
- किन चीज़ों से एलर्जी है
- डॉक्टर का नाम और फ़ोन नंबर
- अस्पताल/क्लिनिक और कोई पंजीकरण या आयुष्मान कार्ड नंबर
इस काग़ज़ की एक कॉपी ज़िप वाली प्लास्टिक थैली में गो-बैग में रखें, एक कॉपी पर्स/बटुए में, और एक फ़ोटो अपने फ़ोन में तथा किसी दूर रहने वाले रिश्तेदार के फ़ोन पर भेज दें। दवा के डिब्बों और पर्चे की फ़ोटो भी खींचकर रख लें — दवा भीग जाए या छूट जाए, तब भी जानकारी बची रहेगी।
राहत शिविर के डॉक्टर के सामने यह एक काग़ज़ रख देना, आधे घंटे की उलझन को दो मिनट में बदल देता है।
इंसुलिन: बिजली कटौती और बाढ़ में ठंडक
इंसुलिन आपदा-तैयारी का सबसे नाज़ुक हिस्सा है, क्योंकि यह गर्मी से ख़राब होता है और भारत की गर्मी में बिजली कुछ घंटे भी जाए तो फ़र्क़ पड़ने लगता है।
कुछ बुनियादी बातें, जिनकी पुष्टि अपने डॉक्टर या फ़ार्मासिस्ट से ज़रूर करें क्योंकि हर ब्रांड के निर्देश अलग होते हैं:
- बिना खुली शीशी/पेन आमतौर पर फ़्रिज में रखी जाती है (फ़्रीज़र में नहीं — जमी हुई इंसुलिन ख़राब हो जाती है और उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए)।
- इस्तेमाल में चल रही शीशी/पेन को कई ब्रांड सीमित दिनों तक कमरे के सामान्य तापमान पर रखने की अनुमति देते हैं — लेकिन यह अवधि और तापमान सीमा ब्रांड के पर्चे पर लिखी होती है, उसी को मानें।
- सीधी धूप, गाड़ी के अंदर और छत के नीचे वाला कमरा — तीनों जगह तापमान बहुत ऊपर चला जाता है। इंसुलिन कभी खड़ी गाड़ी में न छोड़ें।
- रंग बदल जाए, गुठली दिखे या साफ़ इंसुलिन धुँधली दिखे — तो उसे इस्तेमाल न करें और डॉक्टर से पूछें।
बिजली जाने पर क्या करें
- फ़्रिज का दरवाज़ा न खोलें। बंद फ़्रिज कई घंटे ठंडा बना रहता है; बार-बार खोलना ही सबसे तेज़ी से ठंडक ख़त्म करता है।
- पहले से बर्फ़ जमाकर रखें। बोतलों में पानी भरकर फ़्रीज़र में रखने की आदत डालें — बिजली जाते ही ये बर्फ़ की बोतलें फ़्रिज या कूल बैग को घंटों ठंडा रखती हैं।
- कूल बैग + आइस पैक रखें, पर इंसुलिन को आइस पैक से सीधे सटाकर न रखें — बीच में कपड़ा या अख़बार लगाएँ ताकि वह जमे नहीं।
- बिना बिजली वाले विकल्प — इंसुलिन के लिए बनने वाले कूलिंग पाउच (जो पानी से भीगकर वाष्पीकरण से ठंडक देते हैं) उन इलाक़ों में उपयोगी होते हैं जहाँ बिजली रोज़ जाती है। मटके/घड़े के ठंडे पानी वाला पारंपरिक तरीक़ा भी कुछ राहत देता है, पर यह मापी हुई ठंडक नहीं है — इसे अस्थायी उपाय ही मानें।
- ग्लूकोमीटर की स्ट्रिप और बैटरी भी साथ रखें — दवा हो पर जाँच का साधन न हो, तो मात्रा तय करना मुश्किल हो जाता है।
साथ ही डायबिटीज़ वाले हर व्यक्ति के बैग में तेज़ी से शुगर बढ़ाने वाली चीज़ ज़रूर हो — ग्लूकोज़ पाउडर, चीनी के पैकेट या टॉफ़ी। आपदा के दिनों में खाना अनियमित हो जाता है, और लो-शुगर की स्थिति उन्हीं दिनों सबसे ज़्यादा बनती है।
बुज़ुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएँ: तीन अलग सूचियाँ
बुज़ुर्ग
अक्सर पाँच-छह दवाएँ एक साथ चलती हैं, और उनका क्रम याद रखना घर के किसी एक ही सदस्य को होता है — यही जोखिम है। समाधान: साप्ताहिक पिल-बॉक्स (सोमवार से रविवार के खाने), ताकि कोई भी सदस्य देखकर बता सके कि दवा दी गई या नहीं। इसके अलावा चश्मा, नक़ली दाँत और उनका डिब्बा, सुनने की मशीन की अतिरिक्त बैटरी, और चलने वाली छड़ी या वॉकर — ये छूट जाएँ तो निकासी की गति आधी हो जाती है।
बच्चे
बुख़ार की दवा (डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा काग़ज़ पर लिखी हो — वज़न के हिसाब से मात्रा याद रखना मुश्किल होता है), ORS के पैकेट, थर्मामीटर, और अगर दमा है तो इनहेलर व स्पेसर। शिशु के लिए फ़ॉर्मूला दूध, साफ़ बोतल, और डायपर — ये तीनों बाढ़ के बाद दुकानों से सबसे पहले ग़ायब होते हैं।
गर्भवती महिलाएँ
आयरन-कैल्शियम की गोलियाँ, प्रसवपूर्व जाँच की रिपोर्ट की फ़ोटो, अस्पताल और डॉक्टर का नंबर, तथा अनुमानित प्रसव तिथि लिखा काग़ज़। नौवें महीने में हों और इलाक़ा बाढ़-प्रवण हो, तो पहले से यह तय रखें कि सड़क बंद होने पर किस वैकल्पिक रास्ते और किस नज़दीकी केंद्र पर जाना है।
बाढ़ के बाद की बीमारियाँ और घरेलू दवा-किट
बाढ़ का पानी उतरने के बाद का हफ़्ता अक्सर बाढ़ से भी ज़्यादा बीमारी लाता है — दस्त-उल्टी, त्वचा और पैरों में संक्रमण, तथा जमा पानी में पनपे मच्छरों से डेंगू-मलेरिया। इसलिए घरेलू किट में ये चीज़ें जोड़ें:
- ORS के पैकेट (कम से कम 10) — दस्त में सबसे बड़ा ख़तरा पानी की कमी है, और ORS सबसे सस्ता व असरदार उपाय है
- पानी शुद्ध करने की गोलियाँ या क्लोरीन ड्रॉप्स — और उबालने का विकल्प, अगर ईंधन उपलब्ध हो
- एंटीसेप्टिक लोशन, साफ़ पट्टी, गॉज़, मेडिकल टेप
- दस्ताने और मास्क — गंदे पानी में सफ़ाई करते समय
- मच्छर भगाने वाली क्रीम और मच्छरदानी
- गमबूट या बंद जूते — यह दवा नहीं, पर संक्रमण रोकने में दवा से ज़्यादा काम आता है। बाढ़ के पानी में नंगे पैर या चप्पल पहनकर चलने से कटने-छिलने के घाव बनते हैं, जो गंदे पानी में तेज़ी से बिगड़ते हैं
- साबुन और हैंड सैनिटाइज़र — पानी सीमित हो तब भी हाथ की सफ़ाई नहीं छोड़नी चाहिए
घाव, बुखार या दस्त बढ़ने पर घरेलू इलाज़ लंबा न खींचें — मेडिकल कैंप या नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुँचना ही सही रास्ता है। प्राथमिक चिकित्सा की बुनियादी बातें आपदा में प्राथमिक चिकित्सा में विस्तार से दी गई हैं।
निर्णय बिंदु: कब क्या करें
- चक्रवात या भारी बारिश की चेतावनी IMD/NDMA से मिले → उसी दिन दवा की शेष मात्रा गिनें। एक हफ़्ते से कम बची हो तो मौसम बिगड़ने से पहले ही भरवा लें — तूफ़ान के दिन दुकान तक जाना जोखिम भरा और अक्सर बेकार होता है।
- निकासी का आदेश आ जाए → दवा और दवा-सूची वाला काग़ज़ सबसे पहले उठाएँ, कपड़ों से भी पहले। कपड़े शिविर में मिल जाते हैं, आपकी विशिष्ट दवा नहीं।
- बिजली 4 घंटे से ज़्यादा गुल रहे और घर में इंसुलिन हो → कूल बैग/बर्फ़ की व्यवस्था तभी शुरू करें, यह सोचकर न रुकें कि “अभी तो आ ही जाएगी”।
- दवा भीग जाए, या पानी में गिरे डिब्बे से निकाली गई हो → उसे इस्तेमाल न करें और फ़ार्मासिस्ट से पूछें। भीगी हुई गोली की मात्रा और असर पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
- दवा तीन दिन से ज़्यादा छूट चुकी हो → अपने आप दोहरी ख़ुराक लेकर भरपाई करने की कोशिश न करें; मेडिकल कैंप या फ़ोन पर डॉक्टर से पूछें।
- घर में बिजली पर निर्भर उपकरण हो (ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर, नेबुलाइज़र, सीपीएपी) → इनके लिए बिजली कटौती अपने आप में आपात स्थिति है; बैकअप बिजली की योजना पहले से बनाएँ। घरेलू बिजली-कटौती की तैयारी बिजली कटौती की तैयारी: घर के लिए पूरी गाइड में देखें।
आज के काम (20 मिनट)
- घर की सारी दवाएँ एक जगह मेज़ पर निकालें — ज़्यादातर घरों में ये तीन-चार अलग जगहों पर बिखरी होती हैं। यही सबसे बड़ी छिपी हुई कमज़ोरी है।
- हर नियमित दवा की शेष गोलियाँ गिनें — कितने दिन चलेगी, यह संख्या लिखकर देखें।
- एक्सपायरी जाँचें और जो बीत चुकी हो उसे अलग करें (उसे नाली या कूड़े में यूँ ही न फेंकें — मेडिकल स्टोर या स्वास्थ्य केंद्र से निपटान का सही तरीक़ा पूछें)।
- दवा-सूची वाला काग़ज़ बनाएँ और उसकी फ़ोटो खींचकर परिवार के दो लोगों को भेज दें।
- दवाओं को एक ज़िप वाली मज़बूत थैली में डालें और उसे गो-बैग या दरवाज़े के पास रखे बैग में डाल दें — ज़मीन पर नहीं, कम से कम एक मीटर ऊँचाई पर।
- अगली पर्ची पाँच दिन पहले भरवाने का रिमाइंडर फ़ोन में लगाएँ — बफ़र यहीं से बनना शुरू होता है।
पूरी आपातकालीन किट की सूची आपातकालीन किट में क्या रखें में दी गई है; यह लेख उसी किट के सबसे नाज़ुक हिस्से पर केंद्रित है।
सारांश
आपदा में जान का ख़तरा हमेशा तेज़ बहाव या गिरती दीवार से नहीं आता। कई बार वह चुपचाप उस दिन शुरू होता है जिस दिन ब्लड प्रेशर की गोली नहीं मिली, या इंसुलिन गर्मी में ख़राब हो गया।
इसका उपाय महँगा नहीं है — दो हफ़्ते का बफ़र, एक काग़ज़ पर लिखी दवा-सूची, और दवाओं का एक तय ठिकाना जो सबको पता हो। ये तीन चीज़ें मिलकर उस कड़ी को मज़बूत कर देती हैं जो सबसे पहले टूटती है।
आज बस पहला क़दम उठाएँ: घर की सारी दवाएँ एक जगह इकट्ठी करके गिन लें। यही एक काम आपको यह दिखा देगा कि आपके घर की तैयारी असल में कहाँ खड़ी है।
स्रोत
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) — ndma.gov.in आपदा तैयारी दिशानिर्देश और परिवार आपात योजना
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) — mausam.imd.gov.in चक्रवात और भारी वर्षा की चेतावनी
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) — ndrf.gov.in बचाव और सुरक्षा संबंधी जन-जागरूकता सामग्री
- भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी — indianredcross.org प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण और सामुदायिक तैयारी
यह लेख सामान्य तैयारी की जानकारी देता है और चिकित्सकीय सलाह नहीं है। दवा, मात्रा या भंडारण से जुड़ा कोई भी निर्णय अपने डॉक्टर या पंजीकृत फ़ार्मासिस्ट से परामर्श के बाद ही लें। आपात स्थिति में राष्ट्रीय हेल्पलाइन 112 और एम्बुलेंस के लिए 108 पर संपर्क करें।
Ready America 72-Hour Emergency Kit (4-Person)
तैयार 72-घंटे की आपातकालीन किट उन परिवारों के लिए उपयोगी है जिन्होंने अभी तक अपना गो-बैग नहीं बनाया है। इसे शुरुआत मानें, फिर परिवार के आकार के अनुसार ज़रूरी दस्तावेज़, दवाइयाँ, नकद, चार्जर और पानी जोड़ें।
खरीदने से पहले स्थानीय उपलब्धता, डिलीवरी, परिवार के आकार और आधिकारिक सलाह की तुलना करें।
Amazon Associate के रूप में, योग्य खरीदारी से आय हो सकती है।


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