2018 की केरल बाढ़ के दौरान राहत शिविरों में जो बात सबसे बार-बार सामने आई, वह खाने या पानी की कमी नहीं थी — वह था बुजुर्गों का घर छोड़ने से इनकार। परिवार के युवा सदस्य बाहर खड़े थे, पानी घुटनों तक आ चुका था, और दादा-दादी दरवाज़े पर अड़े थे। न इसलिए कि वे चल नहीं सकते थे, बल्कि इसलिए कि उन्हें लग रहा था — “मैं बोझ बन जाऊंगा।” यह फ़ैसला शारीरिक नहीं, भावनात्मक था। और यही वह क्षण होता है जब आपदा सबसे ज़्यादा नुकसान करती है — जब तैयारी नहीं, बल्कि संकोच जान लेता है।
बुजुर्गों को आपदा के लिए तैयार करना सिर्फ़ एक किट बनाने का काम नहीं है। यह उनकी गतिशीलता, उनकी दवाओं, उनकी भावनाओं और उनके निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने का काम है। अगर आपके घर में 60 साल से ऊपर का कोई सदस्य है — चाहे वे फ़िट हों या बीमार — यह लेख उन्हीं के लिए है, और उन परिवारों के लिए जो उनके साथ हैं।
- दवाओं की सूची: यह काम आज, अभी, 10 मिनट में हो सकता है
- वह गलतफ़हमी जो परिवारों को सबसे महंगी पड़ती है
- गतिशीलता और निकासी सहायता: असली चुनौती यहाँ है
- घर में क्या रखें: बुजुर्गों के लिए विशेष किट
- निकासी करें या घर में रहें: यह फ़ैसला कब और कैसे करें
- राहत शिविर में बुजुर्गों के लिए: जो कोई नहीं बताता
- आज का एक काम — जो 10 मिनट में हो सकता है
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दवाओं की सूची: यह काम आज, अभी, 10 मिनट में हो सकता है
बुजुर्गों की आपदा तैयारी में सबसे पहला और सबसे ज़रूरी कदम है — उनकी सभी दवाओं की एक लिखित सूची बनाना। इसमें दवा का नाम, खुराक, और कितने दिन की दवा घर में है — यह सब लिखें। यह सूची एक जलरोधक पाउच में रखें, और उसकी एक फ़ोटो अपने मोबाइल में भी सेव करें।
नियम यह है: कम से कम 7 दिन की दवाएं हमेशा घर में होनी चाहिए — आदर्श रूप से 15 दिन की। बाढ़, चक्रवात, या भूकंप के बाद रास्ते बंद हो जाते हैं और केमिस्ट की दुकानें दिनों तक बंद रह सकती हैं। ओडिशा में 2019 के चक्रवात फ़ानी के बाद कई तटीय ज़िलों में एक हफ़्ते तक आपूर्ति ठप रही — जिन परिवारों के पास पहले से दवाएं थीं, उन्होंने उस दौरान बड़े संकट से बचाव किया।
- दवाओं की सूची में: नाम, मात्रा, कितनी बार लेनी है, और डॉक्टर का नंबर
- ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, हृदय रोग, अस्थमा की दवाएं — इन्हें “प्राथमिकता दवाएं” मानें
- इंसुलिन जैसी दवाएं जिन्हें ठंडक चाहिए — उनके लिए एक छोटा थर्मल पाउच रखें
- चश्मा, श्रवण यंत्र (hearing aid) और उनकी बैटरी भी इसी किट में
यह सूची बनाना आज का सबसे छोटा और सबसे ज़रूरी काम है। 10 मिनट लगते हैं — और आपदा के दौरान यही 10 मिनट की तैयारी घंटों की भागदौड़ से बचाती है।
वह गलतफ़हमी जो परिवारों को सबसे महंगी पड़ती है
ज़्यादातर परिवार सोचते हैं: “दादाजी तो ठीक हैं, वो खुद संभाल लेंगे।” या फिर: “हम हैं न, जब ज़रूरत होगी तब देख लेंगे।” यह सोच ही सबसे बड़ी समस्या है। आपदा राहत कार्यों में बार-बार यह देखा गया है — खासकर बाढ़ और चक्रवात की स्थितियों में — कि बुजुर्ग अक्सर इसलिए नहीं रुकते कि वे चल नहीं सकते, बल्कि इसलिए रुक जाते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि वे परिवार पर बोझ बन जाएंगे।
यह भावनात्मक अड़चन शारीरिक अड़चन से ज़्यादा ख़तरनाक होती है। इसका हल चेकलिस्ट से नहीं, बातचीत से होता है। परिवार को पहले से — न कि आपदा के दौरान — यह बात स्पष्ट करनी चाहिए: “आपको निकलना होगा, और हम साथ हैं।” यह बातचीत एक बार, शांत माहौल में करें।
दूसरी बड़ी गलतफ़हमी: यह मानना कि सरकारी चेतावनी मिलने के बाद तैयारी शुरू होगी। असलियत यह है कि जब IMD (भारतीय मौसम विभाग) रेड अलर्ट जारी करता है, तब बाज़ार में भीड़ होती है, सड़कें जाम होती हैं, और बुजुर्गों के लिए चलना मुश्किल हो जाता है। तैयारी पहले से होनी चाहिए — अलर्ट के बाद नहीं। IMD की मौसम चेतावनियां यहां देखी जा सकती हैं: mausam.imd.gov.in।
गतिशीलता और निकासी सहायता: असली चुनौती यहाँ है
बुजुर्गों की गतिशीलता — यानी उनकी चलने-फिरने की क्षमता — आपदा में निकासी की सबसे बड़ी बाधा बन सकती है। घुटनों का दर्द, कमर की तकलीफ़, या बस उम्र का असर — ये सब तब और बढ़ जाते हैं जब पानी भरा हो, रास्ता फिसलन भरा हो, या रात का अंधेरा हो।
निकासी सहायता की योजना पहले से बनाएं — और यह केवल “कोई न कोई साथ जाएगा” से आगे की बात है। ये सवाल अभी तय कर लें:
- घर से बाहर निकलने में कितना समय लगेगा — उन्हें कपड़े पहनने से लेकर दरवाज़े तक?
- अगर लिफ्ट नहीं है तो सीढ़ियां उतरने में कितना समय? किसे साथ रहना होगा?
- क्या उन्हें व्हीलचेयर, छड़ी, या किसी के कंधे की ज़रूरत है?
- रात में अचानक निकलना पड़े तो टॉर्च कहां है? वो खुद उठा सकते हैं?
अगर घर में कोई बुजुर्ग अकेले रहते हैं, तो पड़ोसी से पहले से बात करें — ग्राम पंचायत या मोहल्ला समिति के स्तर पर यह तय हो सकता है कि आपदा में कौन उनकी ज़िम्मेदारी लेगा। NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) भी सामुदायिक तैयारी पर इसी दिशा में मार्गदर्शन देता है: ndma.gov.in।
एक व्यावहारिक उपाय: एक हल्की, टिकाऊ फोल्डिंग छड़ी या वॉकिंग केन जो किट के पास ही रखी हो — यह छोटी चीज़ फिसलन भरे रास्तों पर बड़ी मदद करती है।
घर में क्या रखें: बुजुर्गों के लिए विशेष किट
सामान्य आपातकालीन किट की बात अलग है — बुजुर्गों के लिए किट में कुछ ख़ास चीज़ें और होनी चाहिए। यह किट एक बड़े, हल्के, वाटरप्रूफ़ बैग में रखें जिसे खींचा जा सके।
बुनियादी ज़रूरतें (3 दिन के लिए न्यूनतम)
- पानी: 3 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन — यानी 9 लीटर कम से कम
- खाना: हल्का, बिना पकाए खाने योग्य — बिस्कुट, चना, सूखे मेवे, ओआरएस पाउडर
- दवाएं: कम से कम 7 दिन की, लिखित सूची के साथ
- टॉर्च: LED टॉर्च और अतिरिक्त बैटरी — बुजुर्गों के लिए रात में रोशनी सबसे ज़रूरी है
- कंबल या हल्की चादर
- मोबाइल चार्जर + पावर बैंक
बुजुर्गों के लिए ख़ास
- डॉक्टर का नाम, अस्पताल और नज़दीकी NDRF यूनिट का नंबर — लिखित रूप में
- पहचान पत्र की फ़ोटोकॉपी (आधार, वोटर ID)
- चश्मा (एक अतिरिक्त जोड़ी अगर संभव हो)
- इनकॉन्टिनेंस पैड्स या ज़रूरी स्वच्छता सामग्री
- मानसिक शांति के लिए: एक परिचित फ़ोटो, या धार्मिक वस्तु — यह छोटी बात बड़ी राहत देती है
अगर परिवार में बुजुर्ग के साथ बच्चे भी हैं, तो पूरी परिवार आपदा योजना के बारे में यह लेख मददगार रहेगा: एक दोपहर में बनाएं परिवार की जीवनरक्षक आपदा योजना।
निकासी करें या घर में रहें: यह फ़ैसला कब और कैसे करें
यह वह सवाल है जो सबसे ज़्यादा उलझन पैदा करता है — और सबसे ज़्यादा ज़रूरी भी है। बुजुर्गों के लिए निकासी का निर्णय जितना देर से होगा, उतना मुश्किल होगा।
यह नियम याद रखें:
- अगर घर के दरवाज़े तक पानी आ गया हो — तुरंत निकलें, सरकारी आदेश का इंतज़ार न करें।
- अगर IMD ने आपके ज़िले के लिए रेड अलर्ट जारी किया हो और बुजुर्ग को चलने में कठिनाई हो — पहले से निकलें, तूफ़ान आने से 12-24 घंटे पहले।
- अगर घर कच्चा हो या निचले इलाके में हो — बाढ़ या चक्रवात की किसी भी चेतावनी पर तुरंत निकासी करें।
- अगर घर पक्का हो, ऊपरी मंज़िल पर जाया जा सकता हो, और पानी बढ़ने की आशंका कम हो — तब घर में रहना सुरक्षित हो सकता है।
बिजली गुल हो जाने की स्थिति में बुजुर्गों के लिए सूचना पाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में एक बैटरी-चालित या हैंड-क्रैंक रेडियो बेहद ज़रूरी है — यह सरकारी चेतावनियां सुनने का सबसे विश्वसनीय तरीका है जब मोबाइल नेटवर्क ठप हो। इस विषय पर अधिक जानकारी यहां मिलेगी: मोबाइल नेटवर्क ठप? इमरजेंसी रेडियो ही बचाएगा जान।
2020 के चक्रवात अम्फान के दौरान पश्चिम बंगाल में जिन परिवारों ने 24 घंटे पहले निकासी कर ली, उनके लिए अनुभव कठिन था — लेकिन जो परिवार चेतावनी के बाद भी रुके रहे, उनमें से कई को बाद में NDRF और राज्य दल को रेस्क्यू करना पड़ा, जिसमें बुजुर्गों को सबसे ज़्यादा जोखिम उठाना पड़ा।
राहत शिविर में बुजुर्गों के लिए: जो कोई नहीं बताता
राहत शिविरों में एक बात जो बार-बार देखी जाती है — बुजुर्गों की सबसे बड़ी तकलीफ़ खाने या पानी की कमी नहीं होती। वह होती है: अपरिचित माहौल, शोर, भीड़, और यह न जान पाना कि परिवार के बाकी लोग कहाँ हैं। यह मानसिक अशांति शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है।
इसके लिए कुछ व्यावहारिक कदम:
- शिविर में पहुंचते ही स्वास्थ्य कर्मचारी को बुजुर्ग की दवाओं की सूची दिखाएं — इसे छुपाएं नहीं।
- अगर बुजुर्ग को डायबिटीज़ है तो शिविर के खाने के समय और मात्रा के बारे में ज़िम्मेदार व्यक्ति को बताएं।
- परिवार का एक सदस्य हमेशा बुजुर्ग के पास रहे — खासकर रात में।
- Indian Red Cross Society के स्वयंसेवक कई बड़े शिविरों में मौजूद रहते हैं — उनसे बुजुर्गों की विशेष ज़रूरतों के बारे में बात करें। अधिक जानकारी: indianredcross.org।
बुजुर्गों में गर्मी से होने वाली तकलीफ़ — खासकर राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र के गर्मी-प्रभावित इलाकों में — शिविरों में एक बड़ी समस्या बन सकती है। बिजली गुल हो और राहत शिविर में पंखे न हों — उस स्थिति में बुजुर्गों को कैसे बचाएं, इस पर ज़रूरी जानकारी यहां है: बिजली गुल हो तो लू से बचने के ये उपाय जानें।
आज का एक काम — जो 10 मिनट में हो सकता है
अगर आपने पूरा लेख पढ़ा और सोच रहे हैं “बाद में करेंगे” — तो बस यही एक काम अभी करें:
घर के बुजुर्ग सदस्य की सभी दवाओं की सूची एक कागज़ पर लिखें। उस कागज़ की फ़ोटो अपने मोबाइल में लें। उस कागज़ को एक पारदर्शी ज़िप-लॉक पाउच में रखें और उनके बिस्तर के पास या किट बैग में रख दें।
इसमें 10 मिनट लगते हैं। और यही वह चीज़ है जो आपदा राहत कार्यों में बार-बार गायब मिलती है — जब परिवार घबराहट में बाहर निकलता है और बाद में पता चलता है कि द
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुजुर्गों के लिए आपदा किट में क्या-क्या रखना चाहिए?
बुजुर्गों की आपदा किट में कम से कम 7 दिनों की दवाओं की सप्लाई, डॉक्टर का पर्चा, ब्लड प्रेशर मॉनिटर और चश्मे जैसे ज़रूरी उपकरण शामिल होने चाहिए। इसके अलावा पहचान पत्र, मेडिकल हिस्ट्री की फोटोकॉपी और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर की लिस्ट भी किट में रखना अनिवार्य है। NDMA की गाइडलाइन के अनुसार, मधुमेह या हृदय रोग से पीड़ित बुजुर्गों के लिए विशेष खाद्य सामग्री भी किट में शामिल करनी चाहिए।
आपदा के समय बुजुर्ग घर छोड़ने से क्यों मना करते हैं और इससे कैसे निपटें?
अधिकतर बुजुर्ग “बोझ बनने के डर” या घर-संपत्ति की चिंता के कारण निकासी से इनकार करते हैं, न कि शारीरिक अक्षमता के कारण — जैसा 2018 की केरल बाढ़ में देखा गया। इससे निपटने के लिए परिवार को पहले से ही बुजुर्गों के साथ निकासी की योजना बनानी चाहिए और उन्हें यह अहसास दिलाना चाहिए कि उनकी सुरक्षा परिवार की प्राथमिकता है, बोझ नहीं। नियमित अभ्यास और भावनात्मक बातचीत से इस मानसिक बाधा को 60-70% तक कम किया जा सकता है।
चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्गों को आपदा के दौरान कैसे निकाला जाए?
जिन बुजुर्गों को चलने में कठिनाई होती है, उनके लिए पहले से ही स्थानीय NDRF टीम या ग्राम पंचायत को उनकी जानकारी देना ज़रूरी है ताकि आपदा के समय प्राथमिकता से मदद मि
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तैयार 72-घंटे की आपातकालीन किट उन परिवारों के लिए उपयोगी है जिन्होंने अभी तक अपना गो-बैग नहीं बनाया है। इसे शुरुआत मानें, फिर परिवार के आकार के अनुसार ज़रूरी दस्तावेज़, दवाइयाँ, नकद, चार्जर और पानी जोड़ें।
खरीदने से पहले स्थानीय उपलब्धता, डिलीवरी, परिवार के आकार और आधिकारिक सलाह की तुलना करें।
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