बिजली कटौती में खाना पकाने की सबसे बड़ी परीक्षा बड़ों के लिए नहीं होती। बड़े लोग एक वक़्त का खाना टाल सकते हैं, ठंडी रोटी खा सकते हैं, या पड़ोसी के यहाँ से कुछ माँग सकते हैं। लेकिन घर में अगर छह महीने का बच्चा है, दाँत कमज़ोर बुज़ुर्ग हैं, या कोई ऐसा सदस्य है जिसे दवा के साथ समय पर खाना चाहिए — तो “आज खाना नहीं बना” कोई विकल्प ही नहीं रहता।
हमारे पिछले लेख में बिजली कटौती में सुरक्षित तरीक़े से खाना पकाने की पूरी जानकारी है — गैस रिसाव की जाँच, कार्बन मोनोऑक्साइड का ख़तरा, और आग से बचाव। यह लेख उससे अलग सवाल उठाता है: जब बिजली नहीं है, तो घर के सबसे कमज़ोर सदस्यों को खिलाया कैसे जाए? यह लेख ख़ास तौर पर उन लोगों के लिए है जो किसी की देखभाल करते हैं — माँ-बाप, बहू-बेटे, या घर के वे सदस्य जिन पर बुज़ुर्गों की ज़िम्मेदारी है।
मैं पहले अग्निशमन सेवा में रह चुका हूँ और आपदा प्रभावित इलाक़ों में तैनात रहा हूँ। राहत शिविरों में जो चीज़ सबसे पहले कम पड़ती है, वह चावल या आटा नहीं होता — वह होता है ऐसा खाना जो एक साल का बच्चा या निगलने में तकलीफ़ वाले बुज़ुर्ग असल में खा सकें।
- 1. छह महीने तक के शिशु: स्तनपान सबसे सुरक्षित रास्ता है
- 2. छह महीने से दो साल तक: छोटा हिस्सा, ताज़ा पकाएँ
- 3. बुज़ुर्ग: चबाने, निगलने और पानी की तीन अलग समस्याएँ
- 4. दवा और खाने का तालमेल: डायबिटीज़ और नियमित दवा वाले सदस्य
- 5. कम पानी में सफ़ाई: वह हिस्सा जो सबसे पहले छूटता है
- 6. पहले से तैयारी: “कमज़ोर सदस्य” वाला अलग डिब्बा
- निर्णय के बिंदु: कब क्या करें
- आज ही करने वाले काम (कुल 30 मिनट)
- सारांश
- वेबसाइट पर आगे पढ़ें
- स्रोत और आधिकारिक जानकारी
1. छह महीने तक के शिशु: स्तनपान सबसे सुरक्षित रास्ता है
आपदा और बिजली कटौती के हालात में स्तनपान का एक बड़ा व्यावहारिक फ़ायदा है: इसमें न बिजली चाहिए, न साफ़ पानी, न बर्तन धोने की व्यवस्था, न भंडारण। यह हमेशा सही तापमान पर उपलब्ध रहता है।
- तनाव से दूध कम होने का डर — कई माँएँ आपदा के दौरान घबरा जाती हैं कि दूध कम हो रहा है और जल्दबाज़ी में बोतल शुरू कर देती हैं। माँ को पानी, खाना और थोड़ी शांत जगह देना — यह पूरे परिवार का काम है, सिर्फ़ माँ का नहीं। शंका हो तो ANM, आशा कार्यकर्ता या डॉक्टर से बात करें
- दूध पिलाने वाली माँ को पानी की ज़्यादा ज़रूरत होती है — राशन बाँटते समय इसे ध्यान में रखें
- राहत शिविर में निजता — एक चादर या दुपट्टे से बनाया गया कोना भी काफ़ी फ़र्क़ डालता है। शिविर के कर्मचारियों से माँगने में झिझकें नहीं
अगर फ़ॉर्मूला दूध देना ही पड़े
जहाँ यह पहले से डॉक्टर की सलाह पर चल रहा हो, वहाँ सफ़ाई सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है, क्योंकि बिजली और साफ़ पानी दोनों सीमित हैं।
- पानी उबालकर ठंडा किया हुआ ही इस्तेमाल करें — बाढ़ या पाइप टूटने के बाद नल का पानी सीधे सुरक्षित न मानें
- बोतल की जगह साफ़ कटोरी और चम्मच बेहतर है जब बोतल-निप्पल को ठीक से साफ़ करना मुमकिन न हो — निप्पल के अंदरूनी हिस्से को बिना गर्म पानी और ब्रश के साफ़ करना लगभग नामुमकिन होता है
- जितना उसी वक़्त पिलाना है, उतना ही बनाएँ — बचा हुआ दूध रखकर दोबारा न पिलाएँ, ख़ासकर तब जब फ्रिज बंद हो। गर्मी-नमी में यह कुछ ही घंटों में ख़राब हो सकता है
- मात्रा और तरीक़ा वही रखें जो डॉक्टर ने बताया है — पाउडर कम डालकर “चलाने” की कोशिश शिशु के लिए ख़तरनाक है
2. छह महीने से दो साल तक: छोटा हिस्सा, ताज़ा पकाएँ
इस उम्र में बच्चे को दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा खाना चाहिए, और यही बिजली कटौती में मुश्किल बनता है — क्योंकि फ्रिज बंद है और हर बार पकाने में गैस लगती है।
- एक बर्तन वाला खाना सबसे काम का है — पतली खिचड़ी, दलिया, सूजी की खीर, मसला हुआ चावल-दाल। प्रेशर कुकर में कम गैस में बन जाते हैं
- बड़ों के खाने में से अलग निकालें, फिर मसला लें — मिर्च-मसाला डालने से पहले बच्चे का हिस्सा निकाल लेना सबसे आसान तरीक़ा है
- बचा हुआ खाना बच्चे को दोबारा न दें — बड़ों के लिए जो जोखिम मामूली है, वही छोटे बच्चे के लिए गंभीर दस्त बन सकता है
- बिना पकाए विकल्प साथ रखें — केला, पका हुआ पपीता, दही (जब तक ठंडक बची हो), भीगा हुआ पोहा, बिस्कुट जो पानी या दूध में घुल जाएँ
- मसलने का चम्मच और कटोरी अलग रखें और हर बार उबले या साफ़ पानी से धोएँ
दस्त हो जाए तो: ORS घोल और उम्र के हिसाब से ज़िंक की सलाह भारत में सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम का हिस्सा है और ये आमतौर पर आंगनवाड़ी केंद्र, उप-केंद्र या PHC पर मिल जाते हैं। घबराकर खाना बंद न करें — खिलाना जारी रखें और स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लें। बच्चा सुस्त पड़ जाए, पेशाब बहुत कम हो जाए, या कुछ भी पीते ही उल्टी कर दे — तो तुरंत 108 या 112 पर मदद बुलाएँ।
3. बुज़ुर्ग: चबाने, निगलने और पानी की तीन अलग समस्याएँ
बुज़ुर्गों के बारे में सबसे आम ग़लतफ़हमी यह है कि “वे कम खाते हैं, तो कम की ज़रूरत है।” असल में आपदा के दौरान बुज़ुर्ग सबसे तेज़ी से कमज़ोर पड़ते हैं, और वजह अक्सर खाना नहीं — पानी होता है।
- प्यास का एहसास उम्र के साथ कम हो जाता है — इसलिए “प्यास लगे तब पिएँ” का नियम बुज़ुर्गों पर ठीक नहीं बैठता। हर एक-दो घंटे पर थोड़ा-थोड़ा पानी देना बेहतर है
- शौचालय की चिंता में पानी कम पीना — राहत शिविरों में यह मैंने बार-बार देखा है। बुज़ुर्ग जानबूझकर पानी पीना कम कर देते हैं ताकि रात में शौचालय न जाना पड़े, और दो दिन में निर्जलीकरण तक पहुँच जाते हैं। हल असली होता है: शौचालय तक जाने का रास्ता, टॉर्च, और साथ जाने वाला कोई व्यक्ति तय कर दें
- नरम खाना पहले से सोचकर रखें — दलिया, खिचड़ी, इडली, मसला केला, दही-चावल, सूप जैसी चीज़ें। सूखे बिस्कुट और भुना चना राहत सामग्री में ज़रूर आते हैं, पर कई बुज़ुर्ग इन्हें चबा ही नहीं पाते
- निगलने में दिक्कत हो तो सीधे बैठाकर खिलाएँ, जल्दबाज़ी न करें, और लेटे हुए कभी न खिलाएँ। खाँसी आए या आवाज़ गड़गड़ाने लगे तो रुक जाएँ और सलाह लें
राहत सामग्री में आने वाला खाना अक्सर नमक और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। जिन बुज़ुर्गों को ब्लड प्रेशर, किडनी या डायबिटीज़ की वजह से परहेज़ बताया गया है, उनके लिए यह अपने आप में एक जोखिम है — इसीलिए उनके लिए अलग से खाने का इंतज़ाम पहले से रखना ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है।
4. दवा और खाने का तालमेल: डायबिटीज़ और नियमित दवा वाले सदस्य
यह वह हिस्सा है जहाँ “खाना” और “इलाज” एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं, और आपदा में सबसे पहले यही तालमेल टूटता है।
- कुछ दवाएँ खाने के साथ या बाद में लेने को कही जाती हैं। अगर खाना देर से बन रहा है, तो दवा का समय अपने आप गड़बड़ा जाता है। ऐसे में दवा छोड़ देने या दोहरी मात्रा लेने का फ़ैसला ख़ुद न करें — यह डॉक्टर या फार्मासिस्ट का काम है
- डायबिटीज़ वाले सदस्य के लिए खाना टालना ख़तरनाक हो सकता है। इंसुलिन या शुगर की गोली लेने के बाद खाना न मिलना ब्लड शुगर गिरा सकता है
- कुछ मीठा हमेशा पास रखें — ग्लूकोज़ पाउडर, चीनी की पुड़िया, या खजूर/गुड़। कम शुगर के संकेत हैं: अचानक पसीना, हाथ काँपना, बहुत तेज़ भूख, चक्कर, उलझन
- अगर व्यक्ति बेहोश है या ठीक से निगल नहीं पा रहा, तो मुँह में कुछ भी न डालें। उसे करवट पर लिटाएँ और तुरंत 108 या 112 पर कॉल करें
दवाओं का स्टॉक और इंसुलिन को बिजली कटौती में सुरक्षित रखने के तरीक़े यहाँ विस्तार से पढ़ें: दवाओं का बैकअप और इंसुलिन का रखरखाव
5. कम पानी में सफ़ाई: वह हिस्सा जो सबसे पहले छूटता है
आपदा के बाद पेट की बीमारी सबसे आम समस्याओं में से एक है, और शिशु व बुज़ुर्ग इससे सबसे जल्दी कमज़ोर पड़ते हैं। पानी कम हो तो सफ़ाई का तरीक़ा बदलना पड़ता है — छोड़ना नहीं पड़ता।
- खिलाने से पहले हाथ — पानी हो तो साबुन से, न हो तो अल्कोहल वाला सैनिटाइज़र। दिखने वाली गंदगी हो तो सैनिटाइज़र काफ़ी नहीं होता, पहले पोंछें
- एक बर्तन, एक व्यक्ति — शिशु और बीमार सदस्य के बर्तन अलग रखें और मिलाएँ नहीं
- बर्तन पर साफ़ पॉलीथीन लगाकर परोसें — खाने के बाद सिर्फ़ पॉलीथीन हटा दें, धोने का पानी बहुत बचता है
- उबालकर ठंडा किया पानी ढककर रखें और उसमें बार-बार गिलास या हाथ न डालें — ढक्कन वाले बर्तन से उलटकर निकालें
- पकाने और खिलाने का काम एक ही व्यक्ति करे तो बेहतर — शिविर जैसी जगहों पर इससे संक्रमण फैलने का रास्ता छोटा हो जाता है
6. पहले से तैयारी: “कमज़ोर सदस्य” वाला अलग डिब्बा
घर के आपात राशन में सबके लिए एक जैसा सामान रखना सबसे आम चूक है। तीन दिन का ऐसा खाना अलग डिब्बे में रखें जो वह व्यक्ति असल में खा सके।
- शिशु के लिए — डॉक्टर की सलाह पर चल रहा फ़ॉर्मूला (अगर लागू हो), साफ़ कटोरी-चम्मच, ज़िप वाली थैली में साबुन, ORS के पैकेट
- छोटे बच्चे के लिए — सूजी, दलिया, पोहा, बिस्कुट जो घुल जाएँ, UHT दूध का टेट्रा पैक
- बुज़ुर्ग के लिए — नरम और कम मसाले वाला खाना, ORS, पीने का पानी अलग से, और अतिरिक्त चश्मा व दाँतों का सेट (यह सबसे ज़्यादा भुलाई जाने वाली चीज़ है)
- दवा वाले सदस्य के लिए — ग्लूकोज़/चीनी, दवाओं की सूची जिसमें दवा का जेनेरिक नाम, मात्रा और समय लिखा हो
- सबके लिए साझा — माचिस और लाइटर, LED टॉर्च (मोमबत्ती नहीं), पोर्टेबल स्टोव और अतिरिक्त कैनिस्टर, पीने का पानी लगभग 3 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन
डिब्बे पर एक काग़ज़ चिपका दें जिसमें बच्चे का ताज़ा वजन और सदस्य की ज़रूरी जानकारी लिखी हो। आपात स्थिति में डॉक्टर के लिए यह जानकारी बहुत काम आती है, क्योंकि छोटे बच्चों की दवा की मात्रा वजन के हिसाब से तय होती है और शिविर में तराज़ू मिलना मुश्किल होता है।
निर्णय के बिंदु: कब क्या करें
- बिजली जाते ही → फ्रिज बंद रखें, और सोचें कि अगला खाना किसका सबसे ज़रूरी है — शिशु, बुज़ुर्ग और दवा वाले सदस्य पहले
- फ्रिज 4 घंटे से ज़्यादा बंद रहे → शिशु और बीमार सदस्य को फ्रिज का बचा हुआ दूध या पका खाना न दें, चाहे बड़े लोग खा रहे हों
- खाना बनने में देर हो रही हो और किसी की दवा का समय हो → बिना पकाए विकल्प (केला, बिस्कुट, गुड़) से काम चलाएँ, दवा का समय टालने से पहले सलाह लें
- बच्चा सुस्त पड़े, पेशाब बहुत कम हो, या पीते ही उल्टी करे → 108 / 112
- बुज़ुर्ग उलझन में दिखें, बहुत कमज़ोर लगें या पानी पीना बंद कर दें → यह सामान्य थकान नहीं है, मदद बुलाएँ
- शुगर कम होने के संकेत दिखें और व्यक्ति होश में हो → कुछ मीठा दें; बेहोश हो तो मुँह में कुछ न डालें, 108 / 112
आज ही करने वाले काम (कुल 30 मिनट)
- घर के हर उस सदस्य की सूची बनाएँ जिसे अलग खाना चाहिए — शिशु, बुज़ुर्ग, डायबिटीज़ या परहेज़ वाला कोई भी व्यक्ति
- हर सदस्य के लिए तीन दिन का ऐसा खाना गिनें जो वह असल में खा सकता है, और जो कमी दिखे उसे अगली ख़रीदारी की सूची में डालें
- ORS के कुछ पैकेट और ग्लूकोज़ का डिब्बा आपात बॉक्स में डालें
- बच्चे का ताज़ा वजन और सभी दवाओं की सूची एक काग़ज़ पर लिखकर बॉक्स में रखें, और उसकी फ़ोटो फ़ोन में सेव करें
- 108, 112 और नज़दीकी PHC/आंगनवाड़ी का नंबर फ़ोन में सेव करें
सारांश
बिजली कटौती में खाना पकाने की सुरक्षा का एक हिस्सा आग और गैस से जुड़ा है — और दूसरा हिस्सा यह है कि घर का सबसे कमज़ोर सदस्य समय पर, सही तरह का खाना और पर्याप्त पानी पा सके। दूसरा हिस्सा अक्सर छूट जाता है, क्योंकि वह धमाके की तरह नहीं दिखता; वह दो-तीन दिन में धीरे-धीरे दिखता है।
मैदान में जो परिवार इस दौर से अच्छी तरह निकलते हैं, वे सबसे ज़्यादा सामान वाले परिवार नहीं होते। वे वे होते हैं जिन्होंने पहले से तय कर रखा होता है कि घर में किसका खाना टाला नहीं जा सकता — और उस एक व्यक्ति के लिए अलग से तीन दिन का इंतज़ाम कर रखा होता है।
वेबसाइट पर आगे पढ़ें
- बिजली कटौती में सुरक्षित खाना पकाने का पूरा तरीक़ा
- आपातकालीन पानी और भोजन का सुरक्षित भंडारण
- बिजली कटौती की घरेलू तैयारी
- आपदा में प्राथमिक उपचार की बुनियादी बातें
स्रोत और आधिकारिक जानकारी
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) — ndma.gov.in
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) — mausam.imd.gov.in
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) — ndrf.gov.in
- भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी — indianredcross.org
- एम्बुलेंस 108 · राष्ट्रीय आपात नंबर 112 · अग्निशमन 101
यह लेख आपदा तैयारी की सामान्य जानकारी है, किसी व्यक्ति विशेष के लिए चिकित्सकीय सलाह नहीं। शिशु आहार, दवा और परहेज़ से जुड़े फ़ैसले अपने डॉक्टर, ANM या आशा कार्यकर्ता से पूछकर ही लें।
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