असम में बाढ़ के बाद के एक राहत शिविर में — जहाँ सैकड़ों परिवार जमा थे — सबसे पहली तकलीफ खाने की कमी नहीं थी। वो थी एक बुजुर्ग महिला जिनकी इंसुलिन की शीशी टूट गई थी बचाव के दौरान, और तीन दिन तक कोई नहीं जानता था कि आसपास कहाँ से मिलेगी। उनके परिवार को किसी ने नहीं बताया था कि दवाओं का बैकअप रखना बाढ़ की तैयारी का हिस्सा है। वो गलती आज भी दोहराई जाती है — हर मानसून में, हर राज्य में।
आपदा के दौरान स्वास्थ्य की जरूरतें संभालना सिर्फ दवा रखने का मामला नहीं है। यह एक पूरी सोच है — यह जानना कि कब क्या चाहिए, किसके लिए, और कितने दिन तक। जून से सितंबर तक का मानसून भारत के लिए सबसे जोखिम भरा समय होता है — बिहार, असम, उत्तराखंड में बाढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तट पर चक्रवात, और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन। इस मौसम में तैयारी न होना एक विकल्प नहीं है।
- घर से निकलने से पहले: दवाओं का बैकअप कैसे तैयार करें
- इंसुलिन भंडारण: बिजली गुल होने पर क्या करें
- राहत शिविर की असली सच्चाई: दूसरा दिन सबसे मुश्किल होता है
- बच्चे, बुजुर्ग और विशेष जरूरत वाले लोग: जिनकी तैयारी अलग करनी होगी
- एक आम गलतफहमी जो जान पर भारी पड़ सकती है
- कब घर छोड़ें, कब रुकें: एक स्पष्ट फैसले का नियम
- आपातकालीन स्वास्थ्य किट: घर पर क्या और कितना रखें
- आज — अभी — एक काम जो 10 मिनट में हो सकता है
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
घर से निकलने से पहले: दवाओं का बैकअप कैसे तैयार करें
जब निकासी का अलर्ट आए और आपके पास 10 मिनट हों, तब यह सोचने का समय नहीं कि दवाएँ कहाँ रखी हैं। इसलिए अभी — आज ही — एक अलग छोटा थैला बनाएँ जिसमें सिर्फ दवाएँ हों। इसे वॉटरप्रूफ पाउच या जिपलॉक बैग में रखें।
इस थैले में क्या होना चाहिए:
- कम से कम 7 दिन की दवाएँ — बुखार, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉइड, अस्थमा — जो भी परिवार में जरूरी हो
- दवा का नाम, खुराक और डॉक्टर का नाम कागज पर लिखकर साथ रखें (फोन बंद हो सकता है)
- ओआरएस के 10 पैकेट (बाढ़ में डायरिया का खतरा सबसे पहले आता है)
- पैरासिटामॉल, एंटीसेप्टिक क्रीम, बैंडेज, और एक थर्मामीटर
- अगर घर में छोटे बच्चे हैं — उनकी उम्र के हिसाब से कफ सिरप और एंटी-एलर्जी दवा
निर्णय का नियम: अगर आपके घर में कोई व्यक्ति ऐसी दवा लेता है जो रोज लेनी जरूरी है — चाहे डायबिटीज हो, हाई ब्लड प्रेशर हो, या मिर्गी — तो उस दवा की सात दिन की अतिरिक्त सप्लाई हमेशा घर में रहनी चाहिए। यह “बाद में कर लेंगे” वाली चीज नहीं है।
इंसुलिन भंडारण: बिजली गुल होने पर क्या करें
डायबिटीज के मरीजों के परिवार के लिए यह सबसे जरूरी सेक्शन है। बाढ़ या चक्रवात में बिजली जाना तय है — और इंसुलिन को ठंडा रखना एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
कुछ जरूरी बातें जो कम लोग जानते हैं:
- खुली हुई इंसुलिन (जो इस्तेमाल में है) — कमरे के तापमान पर (25°C तक) 28 दिन तक सुरक्षित रहती है। फ्रिज की जरूरत नहीं।
- बंद शीशी (अभी उपयोग में नहीं) — इसे ठंडा रखना जरूरी है। बिजली गई तो मिट्टी के घड़े या गीले कपड़े में लपेटकर रखें — इससे तापमान थोड़ा कम रहता है।
- इंसुलिन को सीधी धूप और 40°C से ऊपर के तापमान से बचाएँ — यह खराब हो जाती है।
- निकासी के दौरान इंसुलिन को हमेशा एक छोटे इन्सुलेटेड पाउच में रखें — बाजार में “इंसुलिन कूलर बैग” मिलते हैं जो बिना बिजली के भी कुछ घंटे काम करते हैं।
अगर इंसुलिन का रंग बदल जाए, गाढ़ी दिखे, या उसमें कण दिखें — वो इंसुलिन उपयोग न करें। यह खराब हो चुकी है।
बिजली से जुड़ी और समस्याओं के लिए — जैसे गर्मी में लू का खतरा — यह लेख देखें: बिजली गुल हो तो लू से बचने के ये उपाय जानें
राहत शिविर की असली सच्चाई: दूसरा दिन सबसे मुश्किल होता है
आपदा राहत कार्यों में बार-बार एक पैटर्न दिखता है — पहले दिन सब मिलकर काम करते हैं, सामान बाँटते हैं, एक-दूसरे की मदद करते हैं। दूसरा दिन कठिन होता है। तब तक राशन कम होने लगता है, लोग थके होते हैं, और सबसे जरूरी — जानकारी का अभाव होता है।
राहत शिविरों में सबसे बड़ी अव्यवस्था अक्सर आपूर्ति की कमी से नहीं, बल्कि इस वजह से होती है कि किसी के पास पूरी तस्वीर नहीं होती। अफवाहें फैलती हैं — “अगला ट्रक आएगा नहीं,” “ये शिविर कल बंद हो जाएगा” — और लोग अधूरी जानकारी पर फैसले करते हैं। इससे बचने का एकमात्र तरीका यह है कि आप अपने परिवार की जरूरतें अपने साथ लेकर चलें — दूसरों पर निर्भर न रहें।
शिविर में पहुँचते ही ये काम करें:
- स्वास्थ्यकर्मी या शिविर प्रभारी से मिलें और परिवार में किसी की विशेष दवा/जरूरत बताएँ
- अपनी दवाएँ अपने बैग में अलग रखें — सामान्य राहत सामग्री के साथ न मिलाएँ
- स्थानीय NDRF या जिला आपदा प्रबंधन से जानकारी लें — अफवाहों पर नहीं
बच्चे, बुजुर्ग और विशेष जरूरत वाले लोग: जिनकी तैयारी अलग करनी होगी
संयुक्त परिवारों में — जो भारत में आम हैं — अक्सर एक ही घर में दादा-दादी, बच्चे, और गर्भवती महिलाएँ होती हैं। इनकी स्वास्थ्य जरूरतें अलग-अलग हैं और आपदा में इन्हें अनदेखा करना सबसे महंगा पड़ता है।
बुजुर्गों के लिए: उनकी दवाओं की लिस्ट और उनकी खुराक एक कार्ड पर लिखकर उनकी जेब में या बैग में रखें। अगर वे चलने-फिरने में असमर्थ हैं, तो निकासी की योजना अभी से बनाएँ — किसे बुलाएँगे, कौन साथ जाएगा। बुजुर्गों की विशेष तैयारी के बारे में विस्तार से पढ़ें: बुजुर्गों को आपदा से बचाएं: सही तैयारी कैसे करें?
छोटे बच्चों के लिए:
- 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए — ओआरएस, पैरासिटामॉल ड्रॉप्स, और डायपर का पर्याप्त स्टॉक
- स्तनपान कराने वाली माँ को खुद के लिए पर्याप्त पानी और खाना चाहिए
- बाढ़ के बाद दूषित पानी से बच्चों में डायरिया और पीलिया का खतरा बढ़ता है — पानी हमेशा उबालकर पिएँ
विकलांग व्यक्तियों के लिए: व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, या किसी भी उपकरण की अतिरिक्त बैटरी/सहायक सामग्री हमेशा आपातकालीन किट में रखें।
एक आम गलतफहमी जो जान पर भारी पड़ सकती है
बहुत लोग सोचते हैं कि “सरकार आएगी, राहत मिलेगी, हमें ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं।” यह सोच 2018 की केरल बाढ़ में, 2013 की उत्तराखंड आपदा में, और 2021 के असम बाढ़ में बार-बार गलत साबित हुई। राहत पहुँचती है — लेकिन पहले 72 घंटे आपको खुद ही संभालने होते हैं।
एक और गलतफहमी: “मैं स्वस्थ हूँ, मुझे दवाओं की जरूरत नहीं।” बाढ़ के पानी से त्वचा के संक्रमण, दूषित पानी से टाइफाइड और हैजा, और बंद जगहों में रहने से श्वसन समस्याएँ — ये सबको होती हैं, न सिर्फ पहले से बीमार लोगों को।
क्या न करें:
- बाढ़ के पानी में चलने के बाद घाव को अनदेखा न करें — लेप्टोस्पायरोसिस जानलेवा हो सकता है
- राहत शिविर में मिली दवाएँ बिना पूछे न लें — पहले स्वास्थ्यकर्मी से बताएँ कि आप पहले से क्या ले रहे हैं
- पानी की बोतल भरने के लिए बाढ़ का पानी इस्तेमाल न करें — चाहे थोड़ी देर के लिए ही क्यों न हो
- दवाएँ खत्म होने पर खुद से खुराक कम न करें — इससे स्थिति बिगड़ सकती है
कब घर छोड़ें, कब रुकें: एक स्पष्ट फैसले का नियम
यह वो सवाल है जिसका जवाब आपदा में सबसे मुश्किल होता है। लेकिन अगर स्वास्थ्य जोखिम हो, तो नियम सरल है:
अगर आपके परिवार में कोई ऐसा व्यक्ति है जो — इंसुलिन पर निर्भर है, जिसे ऑक्सीजन सिलेंडर चाहिए, या जिसे डायलिसिस की जरूरत है — और बिजली या सड़क 24 घंटे से ज्यादा बाधित हो सकती है, तो अभी निकलें। आधिकारिक निकासी आदेश का इंतजार न करें।
इसके अलावा:
- अगर पानी का स्तर दरवाजे की दहलीज तक आ जाए — तुरंत निकलें, अगले अलर्ट का इंतजार न करें
- अगर IMD ने आपके जिले के लिए रेड अलर्ट जारी किया हो — यह “निगरानी” का नहीं, निकासी का संकेत है (IMD — mausam.imd.gov.in)
- अगर आप पहाड़ी इलाके में हैं और भारी बारिश हो रही है — भूस्खलन की चेतावनी के बारे में यहाँ पढ़ें: भूस्खलन से पहले ये संकेत दिखें तो तुरंत भागें
घर में रहने का फैसला तभी सही है जब — आपका घर पक्का हो, बाढ़ का पानी फर्श तक न आया हो, आपके पास 3 दिन का खाना-पानी और दवाएँ हों, और परिवार में कोई गंभीर रूप से बीमार न हो।
आपातकालीन स्वास्थ्य किट: घर पर क्या और कितना रखें
एक आपातकालीन स्वास्थ्य किट (health kit) — यानी आपदा के लिए तैयार दवाओं और चिकित्सा सामग्री का थैला — में ये चीजें होनी चाहिए:
- पानी: कम से कम 3 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन — 3 दिन के लिए (4 लोगों के परिवार के लिए 36 लीटर)
- ORS के 20 पैकेट
- पैरासिटामॉल, एंटासिड, एंटी-एलर्जी, एंटीसेप्टिक
- क्रेप बैंडेज, कॉटन, सेफ्टी पिन, दस्ताने
- थर्मामीटर और BP मॉनिटर (अगर परिवार में जरूरी हो)
- परिवार की सभी नियमित दवाएँ — कम से कम 7 दिन का बैकअप
- डॉक्टर का पर्चा और मेडिकल रिकॉर्ड की फोटोकॉपी — एक वॉटरप्रूफ पाउच में
बाजार में एक अच्छा वॉटरप्रूफ फर्स्ट एड पाउच मिलता है जिसमें सभी बुनियादी चिकित्सा सामग्री व्यवस्थित रखी जा सकती है — ऐसे पाउच को आपातकालीन किट का हिस्सा बनाना एक व्यावहारिक कदम है।
संचार के बारे में — अगर मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाए तो स्वास्थ्य संबंधी अपडेट और निर्देश पाने के लिए यहाँ पढ़ें: मोबाइल नेटवर्क ठप? इमरजेंसी रेडियो ही बचाएगा जान
आज — अभी — एक काम जो 10 मिनट में हो सकता है
अगर आप यह लेख पढ़कर सिर्फ एक काम करें, तो यह करें:
अभी उठें, घर में जो भी नियमित दवाएँ हैं उन्हें गिनें, और देखें — क्या 7 दिन का स्टॉक है? अगर नहीं है, तो कल डॉक्टर या मेडिकल स्टोर से अतिरिक्त सप्लाई लेने की योजना बनाएँ। साथ में एक कागज पर हर दवा का नाम, खुराक, और किसके लिए है — यह लिखें और थैले में रखें।
यह एक छोटा कदम है — लेकिन असम, केरल, या ओडिशा के उन परिवारों से पूछिए
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आपदा के दौरान कितने दिनों की दवाओं का बैकअप रखना चाहिए?
विशेषज्ञ कम से कम 7 से 14 दिनों की दवाओं का अतिरिक्त स्टॉक रखने की सलाह देते हैं, विशेष रूप से मानसून सीजन (जून-सितंबर) में। मधुमेह, उच्च रक्तचाप या हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों वाले मरीजों के लिए यह बैकअप और भी जरूरी है क्योंकि राहत शिविरों में विशेष दवाएं अक्सर उपलब्ध नहीं होतीं।
बाढ़ या चक्रवात में इंसुलिन और अन्य नाजुक दवाओं को कैसे सुरक्षित रखें?
इंसुलिन को 2°C से 8°C के बीच रखना जरूरी होता है, इसलिए आपदा किट में एक वॉटरप्रूफ इंसुलेटेड पाउच या कूलर बैग रखें। घर से निकलते समय दवाओं को एयरटाइट जिपलॉक बैग में डबल पैक करें और मूल डॉक्टर पर्चे की फोटोकॉपी साथ रखें ताकि राहत शिविर में दवा दोबारा मिल सके।
आपदा राहत शिविर में मेडिकल मदद कैसे और कहाँ मांगें?
भारत में NDRF और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) राहत शिविरों में मेडिकल टीम तैनात करते हैं जिनसे शिविर प्रभारी के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है। राष्ट्रीय आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 और स्वास्थ्य हेल्पलाइन 104 पर भी कॉल करके दवा या चिकित्सा सहायता की जानकारी ली जा सकती है।
आपदा की तैयारी में बुजुर्गों और बच्चों के लिए अलग से क्या ध्यान रखें?
बुजुर्गों के लिए उनकी सभी नियमित दवाओं की स
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प्राथमिक चिकित्सा किट तभी सबसे उपयोगी होती है जब वह दिखने की जगह पर हो, पूरी हो और बुनियादी प्रशिक्षण के साथ हो। इसमें निजी दवाइयाँ, दस्ताने, घाव की देखभाल का सामान और आपातकालीन संपर्क जानकारी जोड़ें।
खरीदने से पहले स्थानीय उपलब्धता, डिलीवरी, परिवार के आकार और आधिकारिक सलाह की तुलना करें।
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