असम की 2019 की बाढ़ और 2021 के ओडिशा तटीय चक्रवात यास के बाद राहत शिविरों में दर्ज किया गया एक पैटर्न: पहले दिन परिवार ठीक रहता है, दूसरे दिन तक पानी खत्म हो जाता है। क्यों? क्योंकि लोग सिर्फ यह सोचकर पानी रखते हैं कि “दो-तीन बोतल काफी हैं।” लेकिन खाना बनाने, हाथ धोने, और शौचालय के लिए जितना पानी चाहिए — वो पीने के पानी से कहीं ज़्यादा होता है। जब तक यह समझ में आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
यहाँ दी गई जानकारी NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) के “Guidelines on Flood Management” (2008, अद्यतन 2019) और इंडियन रेड क्रॉस के “Disaster Preparedness Manual” (2017) पर आधारित है, साथ ही उन दर्ज राहत कार्यों से जो 2018 केरल बाढ़, 2020 अम्फान, और 2021 यास के बाद संचालित हुए।
- पानी का असली हिसाब: सिर्फ पीना काफी नहीं
- जल शुद्धिकरण: नल बंद हो जाए तो क्या करें
- भोजन भंडारण: समाप्ति तिथि और रोटेशन का सच
- बच्चे, बुज़ुर्ग, और विशेष ज़रूरतें: जो सूची में नहीं होता
- सबसे आम गलती: पानी और खाना रख लिया, लेकिन इस्तेमाल नहीं हो सका
- घर में रहें या निकलें: पानी-भोजन के आधार पर फैसला कैसे करें
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पानी का असली हिसाब: सिर्फ पीना काफी नहीं
सबसे पहले यह तय करें कि आपको कितना पानी चाहिए। प्रति व्यक्ति, प्रति दिन कम से कम 3 लीटर पीने का पानी — यह तो बुनियादी है। लेकिन खाना बनाने के लिए अलग 1–2 लीटर, हाथ-मुँह धोने के लिए अलग, और यदि शौचालय फ्लश करना हो — भारत में प्रचलित कम-फ्लश या लोटा-आधारित शौचालयों में 2–3 लीटर पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि पुरानी हाई-फ्लश टंकी वाले शौचालयों में 8–10 लीटर तक लग सकते हैं, इसलिए अपने घर की व्यवस्था के हिसाब से अनुमान लगाएँ। एक चार सदस्यीय परिवार के लिए तीन दिन का कुल पानी — सिर्फ पीने का नहीं, बल्कि सभी ज़रूरतों को मिलाकर — कम से कम 60–80 लीटर बनता है।
2018 की केरल बाढ़ के बाद राहत शिविरों में सबसे पहली शिकायत खाने की नहीं, बल्कि पानी की थी — और वह भी पीने के लिए नहीं, बल्कि शौच और सफाई के लिए। जो परिवार इस फर्क को समझकर तैयार थे, उन्होंने तीन-चार दिन खुद मैनेज किए।
- पीने का पानी: 3 लीटर × सदस्य × दिन
- खाना पकाने का पानी: 1–2 लीटर × सदस्य × दिन
- सफाई/शौचालय: कम से कम 10–15 लीटर/दिन प्रति परिवार (शौचालय के प्रकार के अनुसार)
- न्यूनतम भंडारण लक्ष्य: 3 दिन के लिए पूरे परिवार का पानी
बड़े प्लास्टिक के बंद ड्रम या BPA-मुक्त कंटेनर पानी स्टोर करने के लिए सबसे सही होते हैं। एक 20–25 लीटर का मज़बूत फ़ूड-ग्रेड कंटेनर, जिसमें एयरटाइट ढक्कन हो, हर परिवार के पास होना चाहिए।
मानसून-विशेष सावधानी (जून–सितंबर): इन महीनों में जलभराव और बाढ़ का खतरा सबसे अधिक होता है। मानसून शुरू होने से पहले — यानी मई के अंत तक — अपना पानी भंडारण जाँच लें और भर लें। बाढ़ के दौरान नल का पानी बंद होने या दूषित होने की संभावना सबसे अधिक इन्हीं महीनों में होती है। पानी के कंटेनर ऊँची सतह पर रखें ताकि जलभराव में वे डूबें नहीं, और ढक्कन कसकर बंद रखें — खुले बर्तनों में मानसून के मौसम में मच्छर तेज़ी से पनपते हैं।
जल शुद्धिकरण: नल बंद हो जाए तो क्या करें
बाढ़ या चक्रवात के बाद नल का पानी दूषित हो सकता है — यह बात सबको पता है। लेकिन ज़्यादातर लोगों को नहीं पता कि उबालना, क्लोरीन टैबलेट, और फिल्टर — तीनों अलग-अलग काम करते हैं और अलग-अलग खतरों के लिए हैं।
उबालना सबसे भरोसेमंद तरीका है — पानी को पूरे 1 मिनट उबालें (ऊँचे इलाकों में 3 मिनट)। यह बैक्टीरिया और वायरस दोनों को खत्म करता है। लेकिन अगर ईंधन नहीं है, तो क्लोरीन टैबलेट (जो बाज़ार में “Water Purification Tablet” या “Halazone” के नाम से मिलती हैं) काम आती हैं — एक लीटर पानी में एक टैबलेट, 30 मिनट इंतज़ार करें। ये टैबलेट रासायनिक प्रदूषण के खिलाफ काम नहीं करतीं, इसलिए बाढ़ का पानी पहले कपड़े से छानें, फिर टैबलेट डालें।
फिल्टर कैंडल वाले घरेलू फिल्टर आमतौर पर बाढ़ के मैले पानी के लिए पर्याप्त नहीं होते — उनमें वायरस नहीं रुकते। सबसे सुरक्षित तरीका है: पहले छानें, फिर उबालें या टैबलेट डालें।
- उबालना: हर स्थिति में सबसे सुरक्षित, अगर ईंधन उपलब्ध हो — बैक्टीरिया और वायरस दोनों नष्ट होते हैं
- क्लोरीन टैबलेट: सस्ती, हल्की, आपातकालीन किट में ज़रूर रखें — जैविक प्रदूषण के लिए प्रभावी, रासायनिक के लिए नहीं
- कपड़े से छानना: मैलापन हटाने के लिए पहला कदम — अकेले काफी नहीं, लेकिन अन्य विधियों से पहले ज़रूरी
- बोतलबंद पानी: सीमित मात्रा में आपात भंडार के रूप में — सील बंद हो तो भरोसेमंद
NDMA के “Guidelines on Flood Management” (2019) के अनुसार बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय जलस्रोत का उपयोग तब तक न करें जब तक जिला प्रशासन की तरफ से सुरक्षित घोषणा न हो। (NDMA India)
भोजन भंडारण: समाप्ति तिथि और रोटेशन का सच
आपातकालीन भोजन की सबसे बड़ी गलती यह है कि लोग एक बार सामान भर लेते हैं और भूल जाते हैं। फिर जब ज़रूरत पड़ती है, तो पता चलता है कि दाल में घुन लग गई, बिस्किट सीलन से खराब हो गए, या समाप्ति तिथि (expiry date) बहुत पहले निकल गई।
रोटेशन का नियम सरल है: जो पहले रखा, वो पहले इस्तेमाल करो। हर 3–6 महीने में अपना आपातकालीन खाने का स्टॉक जाँचें। जो चीज़ें खाने लायक हैं, उन्हें रोज़मर्रा के उपयोग में ले आएँ और नई चीज़ें पीछे रखें। इस तरह आपका स्टॉक हमेशा ताज़ा रहेगा और बर्बादी भी नहीं होगी।
भारत के मानसून के महीनों (जून–सितंबर) में नमी और गर्मी भोजन को जल्दी खराब करती है — इन महीनों में अनाज और आटे में घुन और फफूँद की रफ्तार बाकी मौसमों से कहीं तेज़ होती है। इसलिए:
- चावल, दाल, आटा: एयरटाइट डिब्बों में रखें, मानसून से पहले (मई में) और बाद (अक्टूबर में) — दोनों बार जाँचें
- नमक, चीनी, गुड़: लंबे समय तक चलते हैं — लेकिन मानसून में नमी से बचाना विशेष रूप से ज़रूरी है, गुड़ पिघल सकता है
- बिस्किट, नमकीन: पैकेट बंद हों तो 3–6 महीने तक, खुलने के बाद जल्दी खाएँ
- डिब्बाबंद खाना (canned food): 1–2 साल तक, लेकिन फूला हुआ या जंग लगा डिब्बा कभी न खाएँ
- ORS पैकेट: पानी में मिलाकर तुरंत ऊर्जा और इलेक्ट्रोलाइट्स — आपातकालीन किट का ज़रूरी हिस्सा
एक आसान फैसले का नियम: अगर किसी चीज़ की समाप्ति तिथि अगले 30 दिनों में है, तो उसे अभी खाएँ और उसकी जगह नई चीज़ रखें। यह नियम याद रखने में आसान है और रोटेशन को अपने आप बनाए रखता है।
बिजली जाने पर खाना बनाने की तैयारी के बारे में और जानने के लिए पढ़ें: बिजली गई तो क्या? इन तरीकों से बनाएं सुरक्षित खाना
बच्चे, बुज़ुर्ग, और विशेष ज़रूरतें: जो सूची में नहीं होता
आमतौर पर आपातकालीन भंडारण की सलाह “औसत व्यक्ति” को ध्यान में रखकर दी जाती है। भारत में बड़ी संख्या में घर ऐसे हैं जहाँ दादा-दादी, छोटे बच्चे, और कभी-कभी कोई बीमार सदस्य एक साथ रहते हैं — और यही कारण है कि 2018 केरल बाढ़ और 2021 यास चक्रवात के बाद राहत कार्यों में दर्ज किया गया कि बच्चों के लिए फॉर्मूला दूध, बुज़ुर्गों की दवाएँ, और विशेष आहार — ये तीनों चीज़ें सबसे पहले खत्म हुईं और सबसे मुश्किल से मिलीं। इनकी ज़रूरतें अलग होती हैं और भंडारण अलग से सोचना होता है।
शिशु और छोटे बच्चे: अगर बच्चा बोतल से दूध पीता है, तो फॉर्मूला दूध और साफ पानी का अलग भंडारण ज़रूरी है। ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली माँ को खुद अधिक पानी और पोषण चाहिए। बड़े बच्चों के लिए हल्का, आसानी से पचने वाला खाना रखें — जैसे बिस्किट, मूँगफली, सूखे मेवे।
बुज़ुर्ग सदस्य: कई बुज़ुर्गों को नमक, चीनी, या विशेष आहार की पाबंदी होती है। उनके लिए अलग से कम नमक और कम मीठे वाले विकल्प रखें। दवाइयाँ कम से कम 7 दिन की अतिरिक्त मात्रा में हमेशा भंडारण में होनी चाहिए। बुज़ुर्गों की आपदा तैयारी के बारे में विस्तार से पढ़ें: बुजुर्गों को आपदा से बचाएं: सही तैयारी कैसे करें?
विकलांग या बीमार सदस्य: अगर घर में कोई डायबिटीज, हृदय रोग, या किडनी की बीमारी से पीड़ित है, तो उनके लिए खाने का भंडारण अलग से सोचना होगा। इंसुलिन जैसी दवाएँ ठंडी जगह चाहिए — अगर बिजली गई तो कूलर पैक काम आ सकते हैं।
पालतू जानवर: कुत्ते, बिल्ली, या अन्य पालतू जानवरों के लिए भी 3 दिन का खाना और पानी अलग से रखें। उनका खाना आपका भंडारण नहीं खाना चाहिए।
सबसे आम गलती: पानी और खाना रख लिया, लेकिन इस्तेमाल नहीं हो सका
2020 अम्फान और 2021 यास चक्रवात के बाद राहत कार्यों में एक पैटर्न बार-बार सामने आया: परिवार के पास भंडारण था, लेकिन वे उसका इस्तेमाल नहीं कर पाए। कभी इसलिए कि भंडारण घर के किसी दूसरे हिस्से में था जो पानी में डूब गया, कभी इसलिए कि खाना पकाने का ईंधन नहीं था, और कभी इसलिए कि परिवार के सभी सदस्यों को पता ही नहीं था कि स्टॉक कहाँ है।
यहाँ कुछ गलतियाँ हैं जो भंडारण को बेकार कर देती हैं:
- ज़मीनी मंज़िल पर भंडारण: बाढ़ में सबसे पहले यही डूबता है। ऊँची शेल्फ या पहली मंज़िल पर रखें।
- सिर्फ एक जगह सब कुछ: आपदा में घर का एक हिस्सा बंद हो सकता है। कुछ भंडारण अलग जगह रखें।
- परिवार को नहीं बताया: अगर सिर्फ एक व्यक्ति को पता है स्टॉक कहाँ है, तो वो घर में न हो तो क्या होगा? सभी सदस्यों को बताएँ।
- कच्चे खाने का भंडारण जो बिना गैस पकाए न बने: ऐसी चीज़ें रखें जो बिना पकाए खाई जा सकें — बिस्किट, सत्तू, सूखे फल, मूँगफली।
- पानी को खुले बर्तन में रखना: मच्छर पनपते हैं और पानी दूषित होता है। हमेशा ढक्कन बंद रखें।
2020 में अम्फान चक्रवात के दौरान पश्चिम बंगाल में कई परिवारों के पास राशन था, लेकिन गैस नहीं थी और स्टोव भीगा हुआ था। जिनके पास सत्तू, बिस्किट, या चना-गुड़ था, वे पहले तीन दिन बिना पकाए काम चला सके।
निकासी की तैयारी के बारे में सोच रहे हैं? इसे भी पढ़ें: परिवार को बचाना है तो अभी बनाएं ये जरूरी योजना
घर में रहें या निकलें: पानी-भोजन के आधार पर फैसला कैसे करें
यह सवाल हर आपदा में आता है — और इसका जवाब हमेशा “अधिकारियों की प्रतीक्षा करें” नहीं हो सकता। IMD (भारत मौसम विज्ञान विभाग) की चेतावनी मिलने के बाद भी फैसला आपको लेना होता है।
एक व्यावहारिक नियम जो आपदा राहत में काम आया है:
- अगर आपके पास 3 दिन का पानी और खाना है और घर पक्का है, तो शुरुआती 24–48 घंटे घर पर रहना ज़्यादा सुरक्षित हो सकता है — सड़कों पर अफरातफरी होती है।
- अगर पानी 1 दिन से कम बचा है, या घर कच्चा है, या पानी दरवाज़े की देहरी तक पहुँच गया है — तो तुरंत निकलें, किसी के आदेश का इंतज़ार न करें।
- अगर चक्रवात की “रेड अलर्ट” चेतावनी आई है (IMD की Orange/Red category) — तो सरकारी शेल्टर की ओर बढ़ें, भले ही घर मज़बूत लगे।
घर में रहने या निकलने का विस्तृत विश्लेषण यहाँ मिलेगा: घर छोड़ें या रुकें? आपदा में सही फैसला कैसे करें
जिला कलेक्टर कार्यालय और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के हेल्पलाइन नंबर अपने फोन में पहले से सेव कर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आपातकाल के लिए प्रति व्यक्ति कितना पानी स्टोर करना चाहिए?
NDMA के “Guidelines on Flood Management” (2019) के अनुसार, प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 3-4 लीटर पानी केवल पीने के लिए चाहिए, लेकिन खाना पकाने, हाथ धोने और स्वच्छता को मिलाकर यह मात्रा 15-20 लीटर प्रतिदिन तक पहुँच जाती है। एक परिवार के लिए 72 घंटे यानी तीन दिन के लिए कम से कम 60-80 लीटर पानी का भंडारण आदर्श माना जाता है।
आपातकालीन पानी को घर पर सुरक्षित रूप से कैसे स्टोर करें?
पानी को हमेशा BPA-फ्री, खाद्य-ग्रेड प्लास्टिक के बंद कंटेनरों में ठंडी और अंधेरी जगह पर रखें, और हर 6 महीने में इसे बदलते रहें। नल के साफ पानी में प्रति 10 लीटर पानी में 2-3 बूँद क्लोरीन ब्लीच (5% सोडियम हाइपोक्लोराइट) मिलाकर इसे 30 मिनट तक ढककर रखने से यह पीने योग्य और सुरक्षित बना रहता है।
बाढ़ या चक्रवात के दौरान भोजन स्टोर करने का सही तरीका क्या है?
आपदा के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ स्टोर करें जिन्हें पकाने की जरूरत न हो या बहुत कम पानी चाहिए — जैसे सत्तू, चना, बिस्किट, चावल के मुरमुरे और डिब्बाबंद खाना। इंडियन रेड क्रॉस के “Disaster Preparedness Manual” (2017) में कम से कम 3 दिन और आदर्श रूप से 7 दिन का सूखा राशन पहले से तैयार रखने की सलाह दी गई है, जिसे एयरटाइट डिब्बों में नमी और कीड़ों से दूर रखा जाए।
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