2018 की केरल बाढ़ के बाद राहत शिविरों में एक बात बार-बार सुनने को मिली — लोगों को खाने की नहीं, बल्कि अपनी ब्लड प्रेशर की दवाई की चिंता थी। जो दवा रोज़ लेनी थी, वो घर में रह गई। चश्मा रह गया। बच्चे का स्कूल ID रह गया। छोटे नोट नहीं थे तो दुकान पर खुले पैसे माँगने पड़े। ये नाटकीय चीज़ें नहीं थीं — लेकिन इन्हीं की कमी ने सबसे ज़्यादा तकलीफ दी। आपातकालीन बैग की जो सबसे बड़ी गलती है, वो ये नहीं कि उसमें कुछ कमी है — वो ये है कि जो चीज़ें रोज़ की ज़िंदगी में इस्तेमाल होती हैं, उन्हें हम इतना सामान्य मान लेते हैं कि याद ही नहीं रहतीं। और दूसरी बड़ी गलती? बैग इतना भारी भर लेते हैं कि एक हाथ में बच्चा और दूसरे में बुज़ुर्ग माँ को सँभालते हुए उठाना नामुमकिन हो जाता है — और वो दरवाज़े पर ही छूट जाता है।
- पहले 72 घंटे: जब दुकानें बंद हों और मदद न पहुँची हो
- आपातकालीन बैग में क्या रखें: सटीक और व्यावहारिक सूची
- वो गलती जो बैग को दरवाज़े पर छोड़ देती है
- बच्चे, बुज़ुर्ग और विकलांग परिवार सदस्यों के लिए अलग से सोचें
- कब घर छोड़ें, कब रुकें: एक साफ़ फैसले का नियम
- चक्रवात और मानसून की तैयारी: तटीय और पहाड़ी इलाकों के लिए खास बातें
- आज सिर्फ 10 मिनट में जो कर सकते हैं — वो करें
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पहले 72 घंटे: जब दुकानें बंद हों और मदद न पहुँची हो
आपदा राहत एजेंसियाँ — चाहे NDRF हो या राज्य सरकार — पहले 24 से 48 घंटे में हर जगह नहीं पहुँच सकतीं। NDMA (ndma.gov.in) का स्पष्ट निर्देश है कि हर परिवार को कम से कम 72 घंटे — यानी 3 दिन — अपने दम पर संभालने के लिए तैयार रहना चाहिए। इसका मतलब है कि आपके पास उतना सामान होना चाहिए जो बिना बाहरी मदद के तीन दिन काम आए।
पीने का पानी सबसे पहले आता है। प्रति व्यक्ति, प्रति दिन कम से कम 3 लीटर पानी — यानी 4 लोगों के परिवार के लिए 36 लीटर। अगर घर में बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे या बीमार सदस्य हैं, तो थोड़ा अतिरिक्त रखें। बाढ़ के दौरान नल का पानी दूषित हो जाता है — इसलिए सीलबंद पानी की बोतलें या जल शुद्धिकरण की गोलियाँ (water purification tablets) आवश्यक हैं।
इस विषय पर और गहराई से जानने के लिए यह लेख पढ़ें: आपदा के बाद पानी पीएं या नहीं? ये गलती जानलेवा है
खाने के लिए ऐसी चीज़ें चुनें जो बिना पकाए या कम पकाए खाई जा सकें — चना, मूँगफली, बिस्कुट, चावल के मुरमुरे, नमकीन, और ORS के पाकेट। ORS (Oral Rehydration Salt) हर भारतीय आपातकालीन किट में होना चाहिए — खासकर उन राज्यों में जहाँ गर्मी और बाढ़ दोनों आते हैं।
आपातकालीन बैग में क्या रखें: सटीक और व्यावहारिक सूची
नीचे दी गई सूची किसी सरकारी फ़ाइल से नहीं उठाई गई — यह उन चीज़ों पर आधारित है जो बाढ़ और चक्रवात राहत शिविरों में बार-बार माँगी जाती हैं और जो अक्सर गायब होती हैं।
पानी और खाना
- सीलबंद पीने का पानी — 3 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन × 3 दिन
- जल शुद्धिकरण की गोलियाँ (Halozone या Aquatabs — किसी भी मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं)
- ORS के कम से कम 10 पाकेट
- लंबे समय तक टिकने वाला भोजन: चना, पोहा, बिस्कुट, सूखे मेवे, एनर्जी बार — बिना पकाए खाने योग्य
- एक छोटा स्टील का कटोरा और चम्मच (प्रति व्यक्ति)
दवाइयाँ और प्राथमिक चिकित्सा
- नियमित प्रिस्क्रिप्शन दवाएँ — कम से कम 7 दिन का स्टॉक (डॉक्टर से अग्रिम पर्ची लें)
- पैरासिटामोल, ORS, एंटीसेप्टिक क्रीम, बैंडेज, गॉज़
- मच्छर भगाने की क्रीम या रिपेलेंट (बाढ़ के बाद मलेरिया और डेंगू का खतरा बढ़ता है)
- थर्मामीटर
- दवाओं की सूची एक कागज़ पर लिखकर बैग में रखें
दस्तावेज़ और पैसा
- आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट की फोटोकॉपी — एक ज़िप-लॉक बैग में
- नकद पैसे — छोटे नोटों में (₹10, ₹20, ₹50): आपदा में ATM और UPI अक्सर काम नहीं करते
- बीमा पॉलिसी की कॉपी
- परिवार के सदस्यों के फोन नंबर — हाथ से लिखे हुए (जब फोन बंद हो)
उपकरण और रोशनी
- टॉर्च और अतिरिक्त बैटरी (LED टॉर्च ज़्यादा चलती है)
- एक पोर्टेबल मोबाइल चार्जर (power bank) — पूरा चार्ज किया हुआ
- सीटी (whistle) — मलबे में दब जाने पर आवाज़ देने के लिए
- एक छोटी रस्सी (5–10 मीटर)
- रेनकोट या प्लास्टिक शीट — विशेषकर मानसून के महीनों में (जून–सितंबर)
जो चीज़ें लोग भूल जाते हैं — और सबसे ज़्यादा पछताते हैं
- चश्मा या लेंस का अतिरिक्त जोड़ा
- सुनने की मशीन की बैटरी (अगर परिवार में कोई इस्तेमाल करता है)
- बच्चे की कोई परिचित चीज़ — एक छोटा खिलौना या किताब
- महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड
- एक पतला कंबल या दुपट्टा
वो गलती जो बैग को दरवाज़े पर छोड़ देती है
बाढ़ राहत शिविरों में एक पैटर्न बार-बार देखा जाता है: परिवार भागते हुए आए, लेकिन बैग नहीं लाए। पूछने पर जवाब मिला — “उठा नहीं पाए।” एक हाथ में छोटा बच्चा, दूसरे में बुज़ुर्ग का हाथ — और 15 किलो का बैग उठाने की ताकत नहीं बची।
आपातकालीन बैग की सबसे बड़ी गलती सामग्री की कमी नहीं है — वज़न है। एक व्यक्ति का बैग 10 किलो से ज़्यादा नहीं होना चाहिए। अगर परिवार में 4 लोग हैं — दो बड़े और दो बच्चे — तो सामान दो बैगों में बाँटें। बच्चों के बैग में हल्की चीज़ें रखें जो वो खुद उठा सकें।
बैग चुनते समय एक अच्छा waterproof backpack जिसकी पट्टियाँ मज़बूत हों और जिसे लंबे समय तक पहना जा सके — यह निवेश बाद में काम आता है। एक हैंडबैग या झोला आपदा में जल्दी टूट जाता है या कंधे से गिर जाता है।
बच्चे, बुज़ुर्ग और विकलांग परिवार सदस्यों के लिए अलग से सोचें
संयुक्त परिवारों में — जो भारत में आम हैं — हर सदस्य की ज़रूरत अलग होती है। 2021 के उत्तराखंड बाढ़ और भूस्खलन के दौरान राहत शिविरों में यह देखा गया कि बुज़ुर्ग सदस्यों के लिए विशेष दवाओं की कमी और छोटे बच्चों के लिए ओआरएस व खाने की कमी सबसे बड़ी समस्या थी।
- छोटे बच्चे (0–5 साल): ORS, पाउडर दूध (अगर ज़रूरी हो), डायपर, एक परिचित खिलौना। बुखार की दवा (Paracetamol syrup) ज़रूर रखें।
- बुज़ुर्ग: उनकी सभी दवाएँ, डॉक्टर का नाम और नंबर, मेडिकल हिस्ट्री का सारांश एक कागज़ पर। चलने में परेशानी हो तो एक छड़ी भी बैग के साथ रखें।
- गर्भवती महिलाएँ: अपनी ANC (Antenatal Care) कार्ड और डॉक्टर का नंबर। आयरन और फोलिक एसिड की गोलियाँ।
- विकलांग सदस्य: निकासी का रास्ता और उनकी सहायता के लिए ज़िम्मेदारी पहले से तय करें — आपदा के समय यह तय करने की फुर्सत नहीं होती।
अगर घर में पालतू जानवर हैं, तो उनके लिए भी एक छोटा थैला — खाना, पानी, और पट्टा — अलग से तैयार रखें। राहत शिविरों में जानवर नहीं जा सकते, इसलिए पड़ोसी या रिश्तेदार से पहले से बात करें।
कब घर छोड़ें, कब रुकें: एक साफ़ फैसले का नियम
यह सवाल सबसे ज़्यादा उलझन देता है — “अभी जाएँ या थोड़ा इंतज़ार करें?” इसका जवाब आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार करना नहीं है।
अगर इनमें से कोई एक स्थिति हो, तो बिना देरी के घर छोड़ें:
- पानी आपके दरवाज़े की दहलीज़ तक आ गया हो
- स्थानीय नाला या नदी का पानी सड़क पर आ गया हो
- ज़िला प्रशासन या Gram Panchayat ने निकासी का संदेश भेजा हो (WhatsApp, TV, या लाउडस्पीकर से)
- मकान की दीवारों में दरारें आ गई हों (भूकंप या भूस्खलन के बाद)
- आसमान में अचानक काले बादल छाएँ और तेज़ हवा के साथ बारिश शुरू हो — यह फ्लैश फ्लड का संकेत हो सकता है, खासकर पहाड़ी इलाकों में
अगर घर पक्का (pucca) है, ऊँचाई पर है, और पानी घर के पास नहीं आया — तो घर में रहना सुरक्षित हो सकता है। लेकिन अगर घर कच्चा (kaccha) है, निचली ज़मीन पर है, या छत कमज़ोर है — तो पहले संकेत पर निकल जाएँ।
भूस्खलन के संकेतों को पहचानना भी ज़रूरी है — इस पर विस्तार से पढ़ें: भूस्खलन से पहले ये संकेत दिखें तो तुरंत भागें
चक्रवात और मानसून की तैयारी: तटीय और पहाड़ी इलाकों के लिए खास बातें
ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात के तटीय ज़िलों में हर साल चक्रवात का खतरा रहता है। 2020 के अम्फान चक्रवात में लाखों लोगों को निकाला गया — लेकिन जो परिवार पहले से तैयार थे, उन्होंने राहत शिविर में जाने के बजाय पड़ोसी के पक्के मकान में शरण ली और ठीक रहे।
चक्रवात की चेतावनी IMD (India Meteorological Department) देता है — mausam.imd.gov.in पर नियमित अपडेट मिलते हैं। जैसे ही “Red Alert” या “Orange Alert” जारी हो, आपातकालीन बैग तैयार रखें और District Collector के दफ़्तर या SDMA helpline पर सूचना लें।
पहाड़ी इलाकों — हिमाचल, उत्तराखंड, पूर्वोत्तर — में मानसून के दौरान भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा होता है। इन इलाकों में बैग में एक अतिरिक्त रस्सी, रेनकोट और waterproof shoes ज़रूर रखें।
बाढ़ से जुड़ी आम गलतियों को समझने के लिए यह लेख भी पढ़ें: बाढ़ से पहले ये 7 गलतियाँ आपके परिवार को डुबो सकती हैं
आज सिर्फ 10 मिनट में जो कर सकते हैं — वो करें
पूरी किट एक दिन में नहीं बनती — और ज़रूरी भी नहीं। लेकिन आज 10 मिनट में यह तीन काम करना मुमकिन है:
- परिवार की सभी नियमित दवाओं की सूची एक कागज़ पर लिखें — नाम, खुराक, डॉक्टर का नाम। यही कागज़ बैग में रखें।
- एक पुराना बैग निकालें और उसमें टॉर्च, कुछ नकद (₹500–1000 छोटे नोटों में), और आधार कार्ड की फोटोकॉपी रखें। यही आपकी शुरुआती किट है।
- परिवार के हर सदस्य का फोन नंबर एक कागज़ पर हाथ से लिखें — अगर फोन बंद हो जाए तो यह कागज़ काम आएगा।
इंडियन रेड क्रॉस (indianredcross.org) और NDMA (ndma.gov.in) दोनों मुफ़्त में आपदा तैयारी की जानकारी देते हैं — उनकी वेबसाइट पर जाकर अपने राज्य की गाइडलाइन एक बार ज़रूर देखें।
आपदा में स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों के लिए यह लेख भी उपयोगी है: आपदा में स्वास्थ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आपातकालीन किट में सबसे पहले क्या रखना चाहिए?
आपातकालीन किट में सबसे पहले 72 घंटों के लिए ज़रूरी चीज़ें रखें — जैसे पानी (प्रति व्यक्ति 3 लीटर प्रतिदिन), खाने-पीने का सामान, और नियमित दवाइयाँ। केरल बाढ़ जैसी आपदाओं में देखा गया है कि ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ या थायरॉइड की दवाएँ सबसे पहले याद आती हैं। इसलिए कम से कम 7 दिन की दवाएँ किट में हमेशा रखें।
आपातकालीन बैग कितना भारी होना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार आपातकालीन बैग का वज़न 10-15 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए, ताकि एक वयस्क उसे आसानी से उठा सके। अगर परिवार में बच्चे या बुज़ुर्ग हैं, तो बैग और भी हल्का रखें क्योंकि एक हाथ से बच्चे या बुज़ुर्ग को सँभालना पड़ सकता है। ज़रूरी नहीं हर चीज़ एक ही बैग में हो — परिवार के अलग-अलग सदस्यों में सामान बाँट सकते हैं।
आपातकालीन किट में कौन से दस्तावेज़ रखने चाहिए?
आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट, बैंक पासबुक, और बीमा पॉलिसी की फोटोकॉपी वाटरप्रूफ पाउच में रखें। बच्चों का स्कूल ID और जन्म प्रमाण पत्र भी ज़रूर शामिल करें, क्योंकि राहत शिविरों में पहचान के लिए इनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत पड़ती है। इसके अलावा परिवार के सभी सदस्यों के ब्लड ग्रुप और डॉक्टर के संपर्क नंबर लिखी एक लैमिनेटेड पर्ची भी
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प्राथमिक चिकित्सा किट तभी सबसे उपयोगी होती है जब वह दिखने की जगह पर हो, पूरी हो और बुनियादी प्रशिक्षण के साथ हो। इसमें निजी दवाइयाँ, दस्ताने, घाव की देखभाल का सामान और आपातकालीन संपर्क जानकारी जोड़ें।
खरीदने से पहले स्थानीय उपलब्धता, डिलीवरी, परिवार के आकार और आधिकारिक सलाह की तुलना करें।
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