भारत में गर्मी, मानसून, चक्रवात, बाढ़ और ग्रिड फेल होने पर लंबी बिजली कटौती असामान्य नहीं है। लेकिन 72 घंटे बिना बिजली के “टिकना” किसी बड़े बैग की वजह से नहीं होता—यह सही प्राथमिकताओं से होता है।
मैंने आपदा क्षेत्र में (बड़े भूकंप के बाद) देखा है कि बिजली, पानी, संचार और स्वच्छता टूटते ही लोग घबरा जाते हैं। असल में पहले 72 घंटे में ज़िंदगी को संभालने वाली चीज़ें सीमित हैं—और वही यहाँ बताई गई हैं।
■① 72 घंटे में असली समस्या क्या होती है?
बिजली न होने का मतलब सिर्फ “अंधेरा” नहीं है। असली नुकसान ये हैं:
- पानी की सप्लाई/पंप बंद (या दबाव कम)
- मोबाइल चार्ज नहीं
- गर्मी/ठंड से शरीर पर असर
- खाना खराब होना
- जानकारी/संपर्क टूटना
- टॉयलेट और सफाई की परेशानी
पहले 3 दिन में “लक्ज़री” नहीं—जीवन-रक्षा की जरूरत होती है।
■② सबसे पहले: पानी (हर चीज़ से ऊपर)
72 घंटे के लिए न्यूनतम लक्ष्य:
- प्रति व्यक्ति 9 लीटर (3 लीटर/दिन × 3 दिन)
लेकिन भारत में गर्मी और पसीना अधिक होता है, इसलिए:
- संभव हो तो 12 लीटर/व्यक्ति रखें
महत्वपूर्ण बात: पानी सिर्फ पीने के लिए नहीं—दवा, हाथ साफ, बच्चों/बुज़ुर्गों के लिए भी चाहिए।
मैंने देखा है कि लोग खाना तो जमा कर लेते हैं, लेकिन पानी कम रखकर सबसे पहले टूट जाते हैं।
■③ दूसरी चीज़: रोशनी नहीं, “चार्ज” (कम्युनिकेशन)
लोग टॉर्च ढूँढते रहते हैं, लेकिन असली जीवनरेखा है:
- पावर बैंक (10,000–20,000 mAh)
- एक अतिरिक्त चार्जिंग केबल
- यदि संभव हो: छोटा सोलर चार्जर (लंबी कटौती में बहुत काम आता है)
क्यों?
आपको अपडेट, अलर्ट, परिवार से संपर्क और लोकेशन शेयर—सब मोबाइल से ही करना है।
■④ तीसरी चीज़: गर्मी/ठंड से शरीर की रक्षा
भारत में बिजली कटौती अक्सर गर्मी या तूफान/मानसून में होती है।
- गर्मी में: पानी + नम कपड़ा + हवा का रास्ता (खिड़की/वेंटिलेशन)
- ठंड वाले क्षेत्र में: कंबल/थर्मल लेयर
अगर शरीर थक गया तो निर्णय खराब होते हैं।
आपदा में “ताकत बचाना” भी तैयारी है।
■⑤ चौथी चीज़: खाना—लेकिन ऐसा जो “बिना पकाए” चले
पहले 72 घंटे में सबसे उपयोगी भोजन:
- बिस्कुट/एनर्जी बार
- मूंगफली/चना/ड्राई फ्रूट
- रेडी-टू-ईट (पका हुआ पैक)
- इंस्टेंट फूड (यदि आपके पास गैस/स्टोव है)
गलती: “बहुत खाना” खरीदना जो पकाना पड़े, पानी खाए या जल्दी खराब हो।
साथ में रखें:
- चम्मच/कप
- कूड़ा बैग (स्वच्छता के लिए जरूरी)
■⑥ पाँचवी चीज़: टॉयलेट और सफाई (यहीं लोग टूटते हैं)
72 घंटे में सबसे ज्यादा तनाव:
- शौचालय में पानी न होना
- बदबू, गंदगी, संक्रमण का डर
कम से कम ये रखें:
- मजबूत कूड़ा बैग
- टिशू/वेट वाइप्स
- हैंड सैनिटाइज़र
- साधारण साबुन
यह “छोटी चीज़” लगती है, लेकिन यही आपकी मानसिक स्थिति बचाती है।
मैंने आपदा क्षेत्र में देखा—खाना बाद में समस्या बना, लेकिन टॉयलेट और स्वच्छता ने पहले लोगों को तोड़ा।
■⑦ सच में “ज़रूरी नहीं” क्या है?
लोग अक्सर खरीद लेते हैं:
- बहुत बड़े मल्टी-टूल (कभी इस्तेमाल नहीं)
- ढेर सारी मोमबत्तियाँ (आग का जोखिम बढ़ता है)
- बहुत सारे स्नैक्स, लेकिन पानी/सफाई नहीं
72 घंटे में आपको “हीरो” नहीं बनना है।
आपको बस स्थिर रहना है।
■⑧ आज ही करने वाला छोटा कदम
आज सिर्फ 10 मिनट में यह कर लें:
- पानी की बोतलों की गिनती करें
- एक पावर बैंक चार्ज रखें
- कूड़ा बैग + वेट वाइप्स एक जगह रख दें
बस। यही 72 घंटे का “कोर सेट” है।
■निष्कर्ष
72 घंटे की बिजली कटौती में बचाने वाली चीज़ें 5 हैं:
1) पानी
2) चार्ज (पावर बैंक)
3) शरीर की सुरक्षा (गर्मी/ठंड)
4) बिना पकाए चलने वाला खाना
5) टॉयलेट और स्वच्छता
“ज़्यादा सामान” नहीं—सही प्राथमिकता आपको सुरक्षित रखती है।

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