भारत के कई हिस्सों—जैसे हिमालयी क्षेत्र, उत्तर भारत और पूर्वोत्तर—में भूकंप का जोखिम वास्तविक है। लेकिन सच यह है कि ज़्यादातर लोग नहीं जानते कि पहले 60 सेकंड में क्या करना चाहिए। यही 60 सेकंड जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकते हैं।
यह लेख “आपको क्या करना है” को स्पष्ट, सरल और व्यवहारिक रूप में बताता है।
■① पहले 3 सेकंड: घबराएँ नहीं, झुकें
जैसे ही ज़मीन हिलती महसूस हो:
- तुरंत नीचे झुकें (Drop)
- मज़बूत मेज़ या डेस्क के नीचे जाएँ (Cover)
- उसे कसकर पकड़ें (Hold)
भागने की कोशिश न करें। सीढ़ियों की ओर दौड़ना या दरवाज़े की ओर भागना सबसे बड़ी गलती है।
■② 10 सेकंड के भीतर: सिर और गर्दन की रक्षा
अधिकांश गंभीर चोटें गिरती वस्तुओं से होती हैं।
- बैग, किताब या हाथ से सिर ढकें
- खिड़की से दूर रहें
- काँच, अलमारी और पंखों से दूरी बनाएँ
मैंने एक बड़े भूकंप के बाद देखा—कई लोग खड़े रहे और सिर की चोट से गंभीर रूप से घायल हुए। जो झुके और सिर ढका, वे सुरक्षित रहे।
■③ 30 सेकंड: बाहर नहीं भागना
भूकंप के दौरान बाहर भागना खतरनाक है।
- गिरती ईंटें
- टूटते काँच
- बालकनी से गिरती वस्तुएँ
यदि आप बाहर हैं, तो खुली जगह में जाएँ और बिजली के खंभों से दूर रहें।
■④ 60 सेकंड के बाद: स्थिति का त्वरित आकलन
जब कंपन रुक जाए:
- गैस की गंध जाँचें
- आग या धुआँ देखें
- मोबाइल से तुरंत कॉल न करें (नेटवर्क जाम हो सकता है)
- परिवार के साथ पहले से तय “मिलने का स्थान” याद रखें
■⑤ लोग सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं?
मेरे अनुभव में (पूर्व अग्निशामक के रूप में और आपदा क्षेत्र में तैनाती के दौरान):
लोग “देखने” के लिए बाहर जाते हैं।
जिज्ञासा कई बार जानलेवा होती है।
भूकंप के बाद सबसे ज़्यादा चोटें आफ्टरशॉक में लगती हैं।
■⑥ भ्रम जो जानलेवा है
❌ “दरवाज़े के फ्रेम में खड़े रहो”
यह हर भवन के लिए सुरक्षित नहीं होता। आधुनिक कंक्रीट भवनों में यह पुरानी सलाह लागू नहीं होती।
■⑦ आज आप क्या कर सकते हैं?
आज ही 3 काम करें:
- घर में सबसे सुरक्षित स्थान पहचानें
- परिवार के साथ 60-सेकंड योजना तय करें
- बिस्तर के पास टॉर्च रखें
बस इतना ही काफी है शुरुआत के लिए।
■⑧ अंतिम विचार
आपदा में “तेज़” व्यक्ति नहीं बचता।
“सही निर्णय लेने वाला” व्यक्ति बचता है।
पहले 60 सेकंड में भागना नहीं—झुकना है।
जीवन बचाना तैयारी से शुरू होता है।
■निष्कर्ष
भूकंप के पहले 60 सेकंड में:
झुकें।
ढकें।
पकड़ें।
घबराएँ नहीं।
बाहर न भागें।
सही क्रम ही जीवन है।

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